सोमवार, 20 जुलाई 2020

डार्क सर्किल

स्त्री की सुंदरता देखनी है
उसकी आँखों में नही
आँखों के नीचे बने काले घेरों में देखो
ये घेरे इस बात के साक्षी हैं
कि उसकी सुंदरता आरोपित नही है
उसकी सुंदरता रात रात में अपने बच्चे को लोरी सुनाने और उसका बिस्तर बदलने से आई है
उसकी सुंदरता किसी को आंखों में बसाने से आई है
वे लोग बहुत सौभाग्यशाली होते हैं
जिन्हें एक स्त्री नींद के बदले अपने नयनों में जगह देती है
उसकी सुंदरता गृहस्थी के पाट में पिसकर आई है
ये आँख के नीचे घिरे काले बादल
सींचते हैं हर व्यक्ति को
क्या आपने भी इन घेरों में स्नान किया है?
इन्हें प्रणाम करिए
ये नीलकंठ से भी आदरणीय हैं
सत्य, शिव और सुंदर है
इन्होंने रात को पीकर
सुबह की है

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (22-07-2020) को     "सावन का उपहार"   (चर्चा अंक-3770)     पर भी होगी। 
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
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मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन
हृदय स्पर्शी।
सटीक ।

Onkar ने कहा…

बहुत बढ़िया