सोमवार, 22 नवंबर 2010

सीख लो ...



















पतझड़ो के मौसम में मुस्कराना सीख लो 
हँसते हुए जहान को अपना बनाना सीख लो


फूल अगर मीत है तो कांटे भी गैर नहीं
हर किसी को अपने दिल से लगाना सीख लो


कुछ सुनाओ, गुनगुनाओ ये खामोशी ठीक नहीं
बुलबुल के पास जाकर कोई गीत गाना सीख लो


चाँद नहीं रात में तो रंज किस बात का
अमावास में धरती को जगमगाना सीख लो


सौ बार जनम लेने से इक दोस्त मिलता है
दोस्ती को जनम जनम तक निभाना सीख लो


'वो' रूठते है तुमपे अपना हक जमाने के लिए
रूठे हुए महबूब को फिर से  मनाना सीख लो