शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

एक पत्र-पुष्प अनवर जमाल के नाम



http://pachhuapawan.blogspot.com/2010/11/blog-post_11.html
अनवर जमाल साहब आप की भाषा उतनी ही बढ़िया है जितनी पुरानी फिल्मो में एक अभिनेता थे 'अजीत'. जो बड़े प्रेम से कहते थे 'इसको हैमलाक पिला दो आसानी से मर जाएगा'.रही बात अक्ल के अंधे की तो यह कोई बुरा शब्द नहीं है. लगता है आप जहा से पढ़े है वहा मुहावरे वगैरह नहीं पढाये जाते थे. अक्ल का अँधा अल्प ज्ञानी को कहते है. सत्य को अपने हितो के आधार पर परिभाषित करना अल्पज्ञान ही कहलाता है.रही बात की आपने मुझे अपना भाई कहा तो क्षमा चाहूगा क्योकि आप तो पूरी शिद्दत से सबको 'अपना' बनने में जुटे ही है. जमाल साहब कभी किसी के बन कर तो देखिये. मैने आपके लिए तुम शब्द का प्रयोग किया था. तुम अनौपचारिक शब्द होता है किसी निकट के व्यक्ति को संबोधित करने इस शब्द का प्रयोग होता है. लेकिन मैंने ये मिस्टेक सुधार ली . आप की कमी तो मै बताना नहीं चाहता क्योकि आपको मै तथाकथित मर्मज्ञों की श्रेणी में रखा पाया था किन्तु आपने इस बात को पूछ कर मेरे उस भ्रम को तोड़ दिया. आभार. पहली बात, आप कभी कानपुर आये है कभी बेकन गंज और हबूदा अहाते में गए है अगर नहीं तो आइयेगा . भूख से बिलबिलाते बच्चे आपका अभिनन्दन करेगे. कोई भी व्यक्ति चिल्ला कर यह कहे को इस्लाम का या हिन्दू धर्म का पक्का हिमायती है. मै उसे नहीं मानता धर्म की पहचान व्यक्ति के कर्म से होती है. दूसरी बात की आप कहते है सनातन धर्म( अन्य भी ) कल की बात थी इस्लाम आज की बात है. इसका क्या मतलब है ? जो और धर्म के अनुयायी है परोक्ष रूप से या वास्तविक रूप से इस्लाम के ही अनुयायी है. ऐसा कह कर आप क्या जताना चाहते है ? आपके कहने का मतलब इस्लाम को छोड़ कर सारे धर्म कल की बाते हो गए है. मै इस्लाम का उतना ही सम्मान करता हूँ जितना के स्वधर्म का. किन्तु यह बात मुझे कतई बर्दाश्त नहीं है की किसी धर्म को दूसरे धर्म ऊपर रख कर वाह वही लूटी जाय.

आपके  लिंक मैंने देखे. एक बात समझ लीजिये जादू कभी धर्म नहीं होता.

सनातन धर्म और दयानंद के बारे में कुछ कहने से पहले 'शाश्त्रार्थ परंपरा' के बारे में जानिये.

और अंत में में आपने पूछा की मै किस दुनिया में रहता हूँ तो मै आपको बताता चलू कि कम से कम मै आपकी दुनिया में तो नहीं रहता.

हिन्दू कहे मोहे राम पियारा तुरक कहे रहिमाना
आपस में दोउ लड़ी मुए मर्म ना कहू जाना

कबीर दास जी को अपने करीब लाये तो कुछ ज्ञान चक्षु खुले आपके

दयालु अल्लाह आपको स्वस्थ और सानंद रखे.

आमीन