बुधवार, 27 अक्तूबर 2010

..अरसे के बाद











आधी रात और
पूरा चाँद
मस्त हुआ मौसम
अरसे के बाद
कुछ इस तरह से मुझे
छू जाती ह सबा
जैसे हो  मेरे
बचपन की दिलरूबा
कुदरत की दुआ को
बाहों में लिया है मैंने
पिघलती चांदनी को
जीभर के पिया है मैंने
जोगन बनी सतरंगन
अरसे के बाद
शाद हुआ चाँद  
अरसे के बाद
पूरी हुयी बात
अरसे के बाद