शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

दोगलापन--२ (पुनर्संपादित गुरुघंटाल)













गुरूजी बन रहे  गुरुघंटाल देखिये,
झऊआ भर काट रहे माल देखिये।

हपते में आठ दिन व्रत रहते है,
टमाटर से लाल हुए गाल देखिये।

दिन में करे भजन-पूजन और बको ध्यान,
रतिया मे ठोक रहे ताल देखिये।

लीलाधारी कलाधारी जाने क्या क्या धारी है,
अपटूडेट मदारी का कमाल देखिये।

स्वर्ग पहुचाने का पैकेज बेचते है,
भगवान् के दरबार के दलाल देखिये।

प्राणियों की सेवा ही एकमात्र धर्म है,
आश्रम मे हुए मुरगे हलाल देखिये।

शहर की सडको पर इनकी ही खुदाई है,
चौराहों पर खड़े पंडाल देखिये।

मुस्कान मोहनी है स्वामी है बड़े नटखट,
उनकी अदा पर मच रहे बवाल देखिये।

कालनेमि के वंशधर कलयुग की औलाद है,
जटाजूट नख-शिख विशाल देखिये।

हर शाख पर बैठे हुए है घात लगाए,
चिड़ीमार गुरूजी की चाल देखिये।
गुरूजी बन गए गुरुघंटाल देखिये।