गुरुवार, 29 जुलाई 2010

झज्झर का यक्ष प्रश्न?????













ब्राह्मण  देव मुझे छूने से
इतना क्यों घबराते है
नारायण की  चौखट पर
सारे अंतर  मिट जाते है
मै भी  बना  पंच तत्वों से
प्रभु ने रचा मनोयोग से
क्या जल अछूत पावक अछूत
धरती अछूत अम्बर अछूत
अपने स्वारथ में रत होकर
मानवता को बाँट  दिया
ज्ञान मुझको वंचित कर
अज्ञानी का नाम दिया
प्रभु के यहाँ अछूत ना कोई
वह सबको गले लगाते  है
वह सबको एक समझते है
समदर्शी कहलाते  है फिर,
ब्राह्मण देव मुझे छूने से
इतना क्यों घबराते है??????