बुधवार, 2 जून 2010

तुम्हारी याद ...............


अकेले में तुम्हारी याद आना

अच्छा लगता है,

तुम्ही से रूठना तुमको मनाना

अच्छा लगता है।

धुन्धलकी शाम जब मुंडेर से

पर्दा गिराती है,

सुहानी रात अपनी लट बिखेरे,

पास आती है,

तुम्हारा चाँद सा यूँ छत पे आना,

अच्छा लगता है।

फिजाओं में घुली रेशम नशीला

हो रहा मौसम,

ओढ़कर फूल का चादर सिमटती

जा रही शबनम,

हौले से तुम्हारा गुनगुनाना

अच्छा लगता है।

अकेली बाग़ में बुलबुल बिलखती है

सुलगती है,

रूमानी चांदनी मुझपर घटा बनकर

पिघलती है,

तुम्हारा पास आना मुसकराना

अच्छा लगता है

अकेले में तुम्हारी याद आना

अच्छा लगता है।