शुक्रवार, 14 मई 2010

किरण की सुधि











भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये,
तुम आ जाओ पास में जो तो रुत रूमानी हो जाये।

मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से ,
रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।

रेशम होती हुई हवाए तन से लिपटी जाती है,
पुरवाई में बस जाओ तो प्रीत सयानी हो जाये।


मन बधने सा लगता है अभिलाषाओ के आँचल में,
प्रिय तुम प्रहरी बन जाओ थोड़ी मनमानी हो जाये।