गुरुवार, 26 अगस्त 2010

...खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय










हंसते हुए जीवन को  संवार  लिया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय

उड़ते हुए बादल मस्ती में झूमते है
मस्ती ही जीवन है हमसे ये कहते है
मस्ती में हर घड़ी को गुज़ार लिया जाय

सतरंगे इन्द्र धनुष से कुछ  रंग चुराकर
सांझ की धूप  को आँगन में बुलाकर
बीते हुए लम्हों को दुलार लिया जाय

निशिगंधा की महक  साँसों में भरकर
ओस की बूंदों में तन मन घोलकर
खिली हुयी चाँदनी से प्यार किया जाय
                    ...खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय

बुधवार, 4 अगस्त 2010

तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.












आधी रात बीत गयी बाकी भी बीत जाने दो
तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.

आयेगे और भी मौसम आकर चले जायेगे
पर तुम्हारे जाने से, बेमतलब हो जायेगे.

हवाएं अलसाई है फूलो को निखर जाने दो
चांदनी पिघल  रही है, रात संवर जाने दो.

प्रथम मिलन का प्रिय गीत फिर सुना दो
उस पार जाने से पहले, इक बार मुस्करा दो.

नदी  का गीत यूं टूटकर बिखर जाएगा 
तुम अभी जाओगी तो चाँद मुरझा जाएगा

सुर्ख होठो की लाली पूरब में बिखर जाने दो
तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.