सोमवार, 31 मई 2010

मेरे राम


मुल्क की उम्मीद-ओ -अरमान मेरे राम,

इंसान की मुकम्मिल पहचान मेरे राम।

शिवाला की आरती के प्रान मेरे राम,

रमजान की अज़ान के भगवान् मेरे राम।

काशी काबा और चारो धाम मेरे राम,

ज़मीन पे अल्लाह का इक नाम मेरे राम।

दर्द खुद लिया दिया मुसकान मेरे राम,

ज़हान में मुहब्बते -फरमान मेरे राम।

रहमत के फ़रिश्ते रहमान मेरे राम,

सौ बार जाऊ तुझ पर कुरबान मेरे राम।

हर करम पे रखे ईमान मेरे राम,

तारीख में है आफताब नाम मेरे राम।

वतन में मुश्किलों का तूफ़ान मेरे राम,

फिर से पुकारता है हिन्दुस्तान मेरे राम।

फिर से पुकारता है हिन्दुस्तान मेरे राम।





शनिवार, 29 मई 2010

हराम का खाना

एक मेढ़ा और एक गाय दोनों साथ - साथ रहते थे। मेढ़े को खाने के लिए खूब हरी घास अनाज और ढेर सारी पौष्टिक चीजे मिलती जबकि गाय और उसके बछड़े को रूखा सूखा भूसा मिलता मेढा अपने भाग्य पर खूब घमंड करता। गाय का बछड़ा इस बात से परेशान होकर अपनी माँ से इसका कारण पूछा तो गाय ने उसे समझाते हुए कहा कि बिना मेहनत या उचित प्रतिफल दिए हुए मिला भोजन सदैव दुखदायी होता है इसलिए मेरे बच्चे तू मेहनत से मिली हुई चीजो से पेट भरना सीख हराम का खाना एक दिन जीवन का अंत करवा देता है। बछड़ा बोला तो कुछ नहीं पर ये बात समझ न पाया। एक दिन उसने देखा कि एक आदमी छुरा लिए आया और मेढ़े को लेकर चल दिया। बछड़ा डर गया। जब मोटे ताजे मेढ़े की गर्दन पर छुरा चलने लगा तो उसे माँ की बात समझ में आई कि हराम के खाना का मूल्य क्या होता है।

शनिवार, 15 मई 2010

test

I think that success without hounor is like food without salt, it satisfied your hunger but you can't get a good test.Here TEST refers the pleasure of life.Everybody is in search of pleasure in every activity.In broad way overhelming plaeasure leads to MOKSHA. But one thing more that pleasure must be included with conscienceness.

शुक्रवार, 14 मई 2010

किरण की सुधि











भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये,
तुम आ जाओ पास में जो तो रुत रूमानी हो जाये।

मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से ,
रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।

रेशम होती हुई हवाए तन से लिपटी जाती है,
पुरवाई में बस जाओ तो प्रीत सयानी हो जाये।


मन बधने सा लगता है अभिलाषाओ के आँचल में,
प्रिय तुम प्रहरी बन जाओ थोड़ी मनमानी हो जाये।

गुरुवार, 13 मई 2010

राम कहानी

इस दुनिया में सबकी अपनी राम कहानी है,

कही छलकते पैमाने है कही आँख का पानी है।

चौथेपन में सत्ता का रस छक कर मतवाले पीते है,

गिरती पड़ती ठोकर खाती घायल नयी जवानी है।

पढ़े लिखो की दुनिया में अनपढ़ का गुजारा कैसे हो,

गले लगा कर गला दबाना आदत बहुत पुरानी है।

रातो को नींद नहीं आती दिन भर घबराया रहता ,

हाथ आज खाली खाली औ' बिटिया हुयी सयानी है।

इस दुनिया में सबकी अपनी अपनी राम कहानी है।