सोमवार, 9 नवंबर 2009

Vande Mataram

वंदे मातरम का विरोध करने वाले लोग या तो बावले हो गए हैं, या अपनी राजनितिक रोटी माताओं के शवो पर सेकना चाहते है। मुझे तो ये चतुर सुजान लोग दीखते है। हिंदुस्तान की नीति अब क्या पागल और मानसिक दिवालिया लोग निर्धारित करेगे या माता का अपमान करने वाले ? ये लोग अपने बेटे बेटियों और बहुओ पर ध्यान दे तो ज्यादा अच्छा हो। धर्म व्यक्तिगत मसला है। सरकार केचुए की तरह है उसे वोट बैंक की चिंता है । अगर फतवा जारी करना हो तो अशिक्षा के खिलाफ जारी हो प्रदूषण के खिलाफ हो कुपोषण के खिलाफ हो। दौडे छूटे माँ की वंदना के खिलाफ फतवा जारी कर दिया।
ऐसे लोगो को समाज से धक्के मार कर बाहर कर देना चाहिए । यह जिम्मेदारी हर प्रगतिशील सोच वाले भारतीय की है।

मंगलवार, 20 अक्तूबर 2009

पछुआ पवन

लो भइया हम भी ब्लाग की दुनिया में बहते - बहते आ गये आपको पछुआ पवन का मतलब बताते चले,यह तीव्र गतिशील हवा है जिसको लोग अलग अलग नाम से जानते है। कही यह वेस्टर्न विंड के नाम से जानी जाती है कही पछुआ । आप भी इसका आनंद उठाये (कुछ लोगो के लिए झेलना शब्द उपयुक्त हो सकता है क्योकि "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखि तिन तैसी")