बुधवार, 8 मार्च 2017

हे गोरी तनी बचि के रहू

 हमरे अंगना में आई जोन्हाई हे गोरी तनी बचि के रहू 
  तोहरे देहिया पे छाई फगुनाई हे गोरी तनी बचि के रहू
बगिया में लसे लसा चुवेला हो अमवा
कुहुके कोयलिया कि आवा हो फगुनवा
रस छलके त मनवा बऊराई तोहरे.... हे गोरी तनी बचि के रहू
तोहरे देहिया पे छाई फगुनाई हे गोरी तनी बचि के रहू
खेतवा में फूली सरसों महके महुववा
पुरवा नसे में झूमें हुलसे परनववा
काहे लेहलू तु अईसे अंगड़ाई... हे गोरी तनी बचि के रहू
तोहरे देहिया पे छाई फगुनाई हे गोरी तनी बचि के रहू
रंग में रंगाई गईले धरती गगनवा
होलिया मनावा हमरे संग में सजनवा
तोहके रंगबे आज भर अंकवारी .. हे गोरी तनी बचि के रहू
तोहरे देहिया पे छाई फगुनाई हे गोरी तनी बचि के रहू
(c) डॉ पवन विजय
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1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (12-03-2017) को
"आओजम कर खेलें होली" (चर्चा अंक-2604)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक