गुरुवार, 16 जुलाई 2015

बारहमासी :अइहैं मोर अंगनवाँ हमार बलम

यह लोकगीतों का बारहमासी संस्करण है...लिखने का प्रयास किया है उम्मीद है आप लोग आनंदित होंगे ..


होइहैं कऊन सुदिनवाँ हमार बलम। 
होइहैं कऊन सुदिनवाँ हमार बलम। 

अइहैं मोर अंगनवाँ हमार बलम,
अइहैं मोर अंगनवाँ हमार बलम। 

जबसे लागे है सईंया चईत महिनवा
जबसे लागे है सईंया चईत महिनवा,
टिपटिप चुएला पसिनवाँ हमार बलम। 


परेला फुहार पिया चमके बिजुरिया
परेला फुहार पिया चमके बिजुरिया,
आगि लगावे सवनवाँ हमार बलम। 

काटे कटे न राजा पुसवा के रतिया
काटे कटे न राजा पुसवा के रतिया,
थर थर काँपे बदनवाँ हमार बलम। 

उडि जा रे कगवा उडि जा रे कगवा
उडि जा रे कगवा उडि जा रे कगवा,
आए ना मोर सुगनवाँ हमार बलम।   


  


2 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ४ का चक्कर - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

शानदार भाई !!