रविवार, 26 अप्रैल 2015

भुईडोल अऊर सेसनाग: चौपाली विमर्श

भुई डोल आवा है ए पंडीजी का होई तनी बिचार करा! ...जोखू बड़े चिंतातुर होके पूछे ।
हाँ हाँ सेसनाग जी करवट लिहे हयेन चेन्ता के कोनो बात नाही बा।पंडीजी गुरु गंभीर मुद्रा में बोले ।
मुला सुने कि नेपाल में बड़ा तबाही भै बा।अगर अईसे सेसनाग जी करवट बदलिहैं तब तो लोप होई जाये ... जोखू पुनश्च चिंतित हुआ।
जोखू का लड़का हीरालाल बात सुन रहा था उसके मन में करवट वाली बात सुनके भारी संशय हुआ ...बोला,
कहो पंडीजी सेसनाग के किहु नागिन ओगिन से लभ ओभ त नाही भै... जेके लभ होई जात है ऊ करवट बहुतै बदलत है ...ऊ गाना हवे करवटें बदलते रहे सारी रात हम .... खामखाह ओनके करवट बदले के चक्कर में पूरा देसवा के घनचक्कर बनी जाय ...
पंडीजी कुछ कहते इससे पहले नन्हकऊ मिसिर तपाक से बोले ...ई सार हीरईया के दिमागे में एक्कई बात घुसि बा ...सार टीवी देख देख बौराय ग बा। अबे गदहाचंद जानते नही कब्बो तोहरे बाप दादा गलोबल बारमिंग के नाम सुने रहे ...नाही न ..अब सरऊ तोहरे मूड़े पे जरत चीजु धई दिही जाई त का करबा ? जमीनिया गरम होत बा ..अब सेसनाग जी एक्कै ओरी धरे धरे गरमाई गए होइहई ..सो करवट बदल लिहेन अऊर का ...एम्मे लभ ओभ कहाँ से आई गवा ...पागल सार ...
धरती सेसनाग के फने पे नाही बा ...ई बात बिग्यान अब साबित किहेस तु सभे बेफाल्तू बहस कई रहा हया। दर्जा सात में पढने वाला अभिजीत बोला।
तोके कईसे पता रे ? पंडीजी बोले।
किताबे में लिखा बा ।
तोरे किताबे में कई पन्ना ?
डेढ़ सौ।
हमरे किताबे में पांच सौ पन्ना बा अब बतावा केकर किताब वजनदार ?
पंडीजी की किताब वजनदार ।...भीड़ बोली
फेर जेकर किताब वजनदार ओकर बात वजनदार ....एके भगावा इंहा से ए लोग दुई अच्छर पढ़ी के ग्यान देत हयेन ...अऊर नन्हकऊवा सही कहात बा ...गरमी बढ़ी गै बा भगवान सेसनाग अकुलात बाटें..ओनके शीतलता खातिर एक्खे अनुष्ठान करे के पड़ी...सब तैयार हो ?
हाँ हाँ ...भीड़ चिल्लाई....
पंडित बैजनाथ तिवारी मुस्काते हुये राह लिए .