गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

मुश्किल है आसान नही।


















कच्ची उमर की बात भुलाना मुश्किल है  आसान नही, 
संगी साथी  जज्बात भुलाना मुश्किल है आसान नही। 

जाने कितने चेहरे मुझसे मिलते और बिछड़ते है, 
पर इक उस पगली को भूलना मुश्किल है आसान नही। 

तितली जैसी यादे मुझसे आंख मिचौनी करती है,
कब रुक पायेगी पानी पर, जो रेखाये खिचती है। 

वो गुलाब तो सूख गये जो थे बन्द लिफाफो मे,
पर खत की खुशबू को भुलाना मुश्किल है आसान नही। 


बादल बिजली जंगल परबत बारिश से भीगी रातें,
गीली आँखों ने आपस में जाने क्या  की थी बातें। 

एक जमाना बीत गया जब मुझसे चांदनी लिपटी थी,
अबतक उस सिहरन को भुलाना मुश्किल है आसान नही।