शनिवार, 14 जून 2014

बेटी का पिता के नाम पत्र

आदरणीय पिताजी सादर प्रणाम 

मैं यहाँ सकुशल हूँ और देवी माँ से आपकी कुशलता की कामना करती हूँ। आज आप सोच रहे होंगे की आपकी इंजीनियर बेटी डाक द्वारा क्यों चिट्ठी क्यों भेज रही है ना। पिताजी यूपी में लैपटॉप चार्ज करने के बराबर तो बिजली आती नहीं सो मेल कैसे पढ़ पाते आप ? आगे मैं जो आग्रह कर  रही उसे आप ध्यान से सुनियेगा (बिटिया अब बड़ी और समझदार हो गयी है)  इस बार सावन में भैया को मुझे बुलाने मत भेजिएगा उत्तर प्रदेश में बेटियों से उनका झूला छीन कर पेड़ो की डालियों पर फांसी के फंदे लटकाये जा रहे है। और दूसरा कारण भैया की नौकरी को लेकर है। आपने हम दोनों को इंजीनियर बनाया।  भैया अपने स्कूल के टॉपर थे लेकिन यूपी की इंडस्ट्रीज ऐसे चौपट हुयी कि उन्हें मजबूरन एक इंजीनियरिंग कॉलेज में टीचर बनना पड़ा और कल भैया बता रहे थे कि कॉलेज में एडमिशन कम होने से निकाले जाने की तलवार लटक रही है।  वह आपको छोड़ कर कही और नौकरी नही करना चाहते। 

पिताजी आपने मुझमे और भैया में कभी किसी बात को लेकर भेद नहीं किया सो आज भी नहीं करना।  मैं एक नयी परम्परा डालना चाहती हूँ जिसमे पिता बेटी के यहाँ भी पूरे मान सम्मान के साथ रह सके। जब मैं किसी से सुनती हूँ कि विवाह के बाद तो बेटियो के घर से पानी भी पीना पाप है तो महसूस करती हूँ कि यह भेद जब तक ख़त्म नही होगा तब तक बेटी बेटे में फर्क कायम रहेगा।  जैसे शादी के बाद घर में बहू को बेटी समझा जाता है वैसे ही दामाद को बेटे जैसा ही समझा जाना चाहिए।  है ना पिताजी।  आपकी छुटकी कित्ती प्रवचन देने लगी है।  ये सब आपकी ही तो बातें है जो आप हम सब से कहते थे।  

मैं 'इनको'  इलाहबाद भेज रही हूँ।  आप साथ में चले आईयेगा।  और भैया से कह दीजियेगा कि वो अपना रेज्यूम भेज  दें।  यहाँ कुछ न कुछ व्यवस्था हो जाएगी। 

आपके आने की प्रतीक्षा में 
आपकी बेटी 
अहमदाबाद, गुजरात 


3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (16-06-2014) को "जिसके बाबूजी वृद्धाश्रम में.. है सबसे बेईमान वही." (चर्चा मंच-1645) पर भी है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Vaanbhatt ने कहा…

गुजरात के बहाने यू पी को खींच दिया...

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सार्थक सोच...