मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

तुम भी खामोश थी मै भी खामोश था












तुम  मेरे पास  थी मै  तेरे पास था
एक मीठी मुहब्बत का एहसास था।
आँख झुकती गयी लब सिले रह गये,
तुम भी खामोश थी मै भी खामोश था।।

रात ढलती  रही   प्यार पलता रहा
सांसो की सरगमी धुन को गुनता रहा।
जनमों की अमावस बनी पूर्णिमा ,
मेरी आगोश में चाँद सोता  रहा ।।

झूमता है जहाँ गीत पर जो मेरे
छंद है ये लिखे  जो थे तेरे लिए।
मेरे होंठो पे जो शब्द तुमने रखे ,
उम्र  भर मै  उसे गुनगुनाता रहा  ।।