शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

नवभारत टाईम्स बनाम हनी सिह: चोर चोर मौसेरे भाई

इंटरनेट पर गन्दगी फैलाने मे नवभारत टाईम्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उत्तेजना को उकसाने वालो के लिये भी कोई कानून बने. बलात्कार जैसे अपराध के व्यक्ति तो जिम्मेदार है ही साथ ही बलात्कारी मानसिकता का निर्माण करने वाले फैक्टर्स की भी खोज करके उन्हे समाप्त करने की जरूरत है. मुझे कहने मे कोई गुरेज नही कि नवभारत टाईम्स एक समाचार पत्र की नही बल्कि बलात्कारी मानसिकता निर्माण करने का मुखपत्र है.

नवभारत टाईम्स और हनी सिह दोनो एक ही तरीके से चल रहे है. अश्लीलता मानव को अपनी ओर खीचती है आकर्षित करती  है उत्तेजित करती  है. उत्तेजना के सहारे बाजार मे बना रहा जा सकता है और बिका जा सकता है. जिस तरह इंडिया टुडे समेत तमाम पत्रिकाओ का पोर्नाईजेशन हुआ है उससे यह बात साबित हो जाती है कि पोर्न से लिपट कर आप न केवल जिन्दा रह सकते है बल्कि लोगो को पीछे छोड सकते है.समाज मे होने वाले बलात्कार और अन्य अपराधो को प्रोत्साहित और उनकी मार्केट वैल्यू बढाने मे नवभारत टाईम्स अपनी पूरी पूरी भूमिका निभा रहा है. आप इस समाचार पत्र को अपने परिवार के साथ नही पढ सकते है. माता पिता भाई बहन के साथ तो कतई नही. नंगी औरते दिखा कर यह अखबार ना जाने कौन सा मजा देना चाहता है खबरो की सनसनी से किसका भला होगा? वैसे कहने को धर्म साहित्य और दर्शन के भी ब्लाक आप पा सकते है किंतु क्या कभी एक ही थाली मे प्रभु प्रसाद और मल मूत्र को रख कर परोसा जा सकता है?
नवभारत टाईम्स सडी और बदबूदार मानसिकता का  द्योतक है, प्रतिनिधित्व है. ऐसे मे "प्रताप" की बहुत याद आती है.