गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

मैं बिलकुल अच्छा हूँ














मैं कैसे हूँ ? 
आखिर तुमने पूछ ही लिया  ना 
बिलकुल वैसा 
बेतरतीब, आलसी, तकरीबन निठल्ले जैसा 
तुम्हे भी तो पसंद था
मेरा बेतरतीब होना।  
++++++++ 
फालतू चीजें आज भी इकट्ठी रहती हैं 
मेरे आस पास, 
शेल्फ की  किताबों पर 
धूल कुछ ज्यादा जम गयी है 
तुम्हारे अधरों में  रंगी मूँगिया शाम 
आज भी मुड़ी  तुड़ी 
टंगी है  अलगनी से। 
+++++++++
कुछ पन्ने, 
जो अब हल्दी वाले रंग में रंग गये हैं 
शायद वे मुझसे ज्यादा संवेदनशील हो गये 
या वक्त का असर हो गया 
घेरे रहते है, 
जिन पर लिखी है 
समाजशास्त्र की परिभाषायें 
और कुछ प्रेमगीत।
++++++++++ 
दो कप कॉफ़ी के 
"हो शुरू हर पल" वाले,
और मीडियम वेव वाला रेडियो 
बस्स इतनी सी तो बाते है, 
बाकी जो भी है 
वह तुम्हारा ही तो "रिफलेक्शन" है। 
+++++++++++
न्यूज़ पेपर पढ़ती हो क्या 
(मीडिया भी ना )
तलाशी में सिर्फ एक कलम ही तो मिली थी 
वो जो इग्जाम के लिए तुमने दिया था बस्स। 
+++++++++++
मैं बिलकुल अच्छा हूँ, 
तुम समझ रही हो ना 
बच्चे से कहना स्नेह, 
और मुझसे ज्यादा "उस" प्रबल भाग्य वाले को भी
बिना लिए नाम मेरा। 
+++PM+++


7 टिप्‍पणियां:

Amrita Tanmay ने कहा…

वाह! क्या खूब..

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति !
नई पोस्ट भाव -मछलियाँ
new post हाइगा -जानवर

Rajeev Kumar Jha ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : रोग निवारण और संगीत

Rajeev Kumar Jha ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-12-2013) "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1461 पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!

S.M Masum ने कहा…

अरे भाई लिखते ऐसा हो की कमेन्ट करना ही पद जाता है :)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
पोस्ट का लिंक कल सुबह 5 बजे ही खुलेगा।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-12-13) को "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1462 पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (15-12-13) को "नीड़ का पंथ दिखाएँ" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1462 पर भी होगी!