रविवार, 28 अप्रैल 2013

रेवडिया, बताशे और इनाम कुमार: अथातो 'विज्ञान परिषद' पुरस्कार कथा.


बताशे की गंध हवाओं में तैरने  लगी तो मैंने सोचा की क्या मै  काठमांडू पहुच गया। पर सर झटका  चश्मा उतारा तो धुल धक्कड़ देख के तसल्ली हुयी कि  अब्बै  तो कानपुर में ही है . खैर 'सामलाल' से पता चला की यह गंध तो मेरे प्यारे शहर इलाहाबाद से आ रही है. पता चला 'राष्ट्रभाषा हिन्दी के माध्यम से विज्ञान लोकप्रियकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये विज्ञान के प्रति समर्पित संस्था 'विज्ञान परिषद प्रयाग' ने अपने शताब्दी वर्ष में विभिन्न विभूतियों को  'विज्ञान परिषद प्रयाग शताब्दी सम्मान' से विभूषित किया ' 
प्रथम दृष्टया यह देख के  मन को तसल्ली हुयी कि बडे भाई   डा अरविन्द मिश्र जी को शताब्दी सम्मान से विभूषित किया गया। पुरस्कारों के 'ओरिएंटेशन' को लेकर मन में जो कान्फ्लिक्ट  था दूर होने लगा परन्तु हतभाग्य 'इनाम कुमार' जी हमेशा की तरह चिर स्मित मुसकान लिए वहा भी विराजमान थे। इसके बाद जो मैंने श्रीयुत शेषमणि जी से जानकारी प्राप्त की तो दिमाग में पुरस्कारों की  'परिकल्पना' जो बनी उसे याद करके अब भी लग रहा है की इससे अच्छा तो साला भिखारी की तरह कटोरा लेके 'बारा देवी' के चौराहे पर बैठना ठीक है. जीभ निकाले रेवाडियो का स्वाद लेने के लिए लोगो ने अपनी मान मर्यादा और पद की गरिमा को जिस तरह से ताक पर रखने का क्रम शुरू किया है उससे देखकर लगता है की वह दिन दूर नहीं जब ठेले पर इनाम रखे 'सामलाल' दरवाजे दरवाजे आवाज लगायेंगे इनाम लेल्लो, या बिसारती लोग टिकुली बिंदी चूड़ी के साथ दुई चार इनाम भी बक्से में लेके चलेंगे जाने कब कहा बाटने का मौक़ा मिला जाये।
ज्यादा क्या लिखे भाई लोग मेरे ऊपर मुकदमा करने को आतुर है इसलिए अगर हम किसी को इनाम नहीं दे सकते तो कम से कम बधाई तो दे ही दे
शताब्‍दी सम्‍मान के समापन के अवसर पर 27 अप्रैल 2013 को आयोजित कार्यक्रम में विज्ञान परिषद ने जिन दो  दर्जन से अधिक विज्ञान लेखकों को उनके अपरिमित योगदान  के लिए सम्‍मानित किया जिनमे  डॉ0 मिश्र के अतिरिक्‍त  शुकदेव प्रसाद, डॉ0 राजीव रंजन उपाध्‍याय, निमिष कपूर, मनीष मोहन गोरे, अमित कुमार एवं विशेष रूप से  ब्‍लॉगर कृष्‍ण कुमार यादव  को भी हार्दिक बधाई ।
साथ में यह न्यूज जो कि राजा हिन्दुस्तानी ने उपलब्ध करायी है, सम्मान महात्म्य के रूप में पढने से इस कथा का पूरा लाभ और पुण्य दोनों प्राप्त होगा.  
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9 टिप्‍पणियां:

Harshkant tripathi ने कहा…

Abhi abhi news padha ki jharkhand ke siksha mantri ji apne PA ki biwi ko lekar farar h. Aise nich ko siksha mantri ka pad bhi to hamari vyavastha ne samman swaroop pradan kiya hai.

ramji ने कहा…

गधे पंजीरी फांक रहे हैं , पंडित जी (बिद्वान )के सालिग्राम (विद्वता ) लुढका दिए गए हैं ,,,ये कलिकाल है , इसमे हंस चुनेगा दाना , कौआ मोती खायेगा .....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हा हा मस्त व्यंग धार ...
बधाई या खिचाई ... चलो काफिया तो एक ही है ... गज़ल अच्छी बनेगी ...

Raja Hindustani ने कहा…

Pande ji, ye to galat bat hai. maine aap ko news ka link diya aur apne mujhe dhanyawad bhi nahi kiya.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार के "रेवडियाँ ले लो रेवडियाँ" (चर्चा मंच-1230) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

हा हा हा रोचक व्यंग लिखा आपने |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Dr. Santosh Kumar Yadav 'Anveshak' ने कहा…

सही कहा आपने। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि एक बार फिर नारीवाद का असली और घृणित चेहरा सामने आ गया है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

हाहाहाहहाह..
कोई नहीं ! जिसके पास जिस चीज की कमी रहती है वो उसे हासिल करने के लिए हर स्तर पर प्रयास करता है। लेकिन क्या कहूं, सम्मान को भी ये लोग महज कागज का टुकडा समझ लेते हैं। खैर गनीमत है कि भाई साहब ने इस बार अकेले सम्मान लिया, वरना पत्नी को भी ले जाते, तो हम उनका क्या बिगाड़ लेते ? धीरे धीरे उनकी समझ में आ जाएगा।

vandana gupta ने कहा…

तभी तो कहा गया है अंधा बाँटे रेवडी फिर फिर अपने को दे :)