मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

तुम भी खामोश थी मै भी खामोश था












तुम  मेरे पास  थी मै  तेरे पास था
एक मीठी मुहब्बत का एहसास था।
आँख झुकती गयी लब सिले रह गये,
तुम भी खामोश थी मै भी खामोश था।।

रात ढलती  रही   प्यार पलता रहा
सांसो की सरगमी धुन को गुनता रहा।
जनमों की अमावस बनी पूर्णिमा ,
मेरी आगोश में चाँद सोता  रहा ।।

झूमता है जहाँ गीत पर जो मेरे
छंद है ये लिखे  जो थे तेरे लिए।
मेरे होंठो पे जो शब्द तुमने रखे ,
उम्र  भर मै  उसे गुनगुनाता रहा  ।।


6 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

रात ढलती रही प्यार पलता रहा
सांसो की सरगमी धुन को गुनता रहा।
जनमों की अमावस बनी पूर्णिमा ,
मेरी आगोश में चाँद सोता रहा ।।

बहुत खूब ... काश ये रात यूं ही ठहरी रहे ... चांदनी सोती रहे ...

Rajendra Kumar ने कहा…

मधुर मुहब्बत का एहसास,बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति.

रविकर ने कहा…

शुभकामनायें-
सुन्दर प्रस्तुति -

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना

vandana gupta ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति

ramji ने कहा…

रात सांवली आ गयी लिए प्रेम का राग
बजी बांसुरी श्याम की ग्गोपी हुई निहाल
रजनी के ही रूप में श्याम ने रंगा रूप
राधा सजनी बन गयी ,श्याम रंग में डूब