मंगलवार, 19 जून 2012

ज़िन्दगी एएम से पीएम के बीच झूल रही

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ठीक छह एएम पर 
अलार्म की आवाज के साथ 
उठ जाता हू रोजाना,
जागने की कोशिश करता हू 
अधमुन्दी आंखे ढूढ लेती है 
यंत्रवत  ब्रश मंजन और अखबार,
साढे आठ बजे दफ्तर रवाना 
नौ बजे अंगूठे वाली मशीन 
बोलती है थैंक यू.
दफ्तर मे और भी रोबोटिक लोग है
विशेष लक्षणो और गुणो वाले
हाथ मिलाते है,गुड्मार्निंग सर
हल्की हल्की बुदबुदाहट भी
अस्साला हरामी कही का... 
जून के महीने की गरमी 
आठ घंटे मे पसीने का 
रंग लाल कर देती है. 
बच जाती है खून की सफेदी 

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घर पहुचते पहुचते 
छह पीएम बजते है.
टीवी पर महाबहस जारी है
चौरसिया ने सडे दात निपोरते हुये 
बहस की शुरुआत की 
शकील की रे रे और
मनीष की ओढी गम्भीरता
से बहस आगे बढती है फिर,
कुकुरकाट मे तब्दील हो जाती है
दफ्तरी फाईलो को निपटाते दस पीएम
किर्र र्रर्रर इनवर्टर बोल  रहा है 
बिजली नहीं, सेवा समाप्त
ज़िन्दगी एएम से पीएम के बीच झूल रही
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सारी रात गुजरती है रोटी दाल के जोड़ घटाने में 
एक  मुद्दत हो गयी है ख्वाबो में तुम्हे देखे हुए.