सोमवार, 31 दिसंबर 2012

नये साल पर शुभ का मनाये ?




"बच्चन" जी कहते है कि जो बीत गयी सो बात गयी  मै इससे ज्यादा इत्तेफाक नही रखता बीती बाते इतनी आसानी से भुला नही पाता या यो कहिये कि जेहन से जाती ही नही। बीता  वर्ष काफी आघातकारी रहा था एक उम्मीद के सहारे आगे का रास्ता तय करने को है। प्रस्तुत रचना के माध्यम से अपनी बात रखने की कोशिश करा रहा हूँ।

नए साल पर पूरी कर
मेरे मन की मुराद मौला
मेरे वतन के सीने पर
ना हो कोई फसाद मौला।

बच्चों का आँगन ना छूटे,
बूढ़े नींद चैन की सोवें
बहने चहके चिडियों सी
माओं की गोद आबाद मौला।  

रोटी कपडा मकान
हर इक  शख्स को हासिल हो
प्यार की फ़स्ल उगाये
ज़मी रहे दिल शाद मौला। 

पाप लोभ भय दूर हो
तन से मन से जन जन से
गंगा जमुना का पानी अब
और न हो बरबाद मौला।

7 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

कविता रावत ने कहा…

सच बीते बातें कहाँ जेहन से जाती हैं ..
बहुत बढ़िया ..
सके लिए नववर्ष मंगलमय हो यही शुभकामना है।।

रविकर ने कहा…

मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।
आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े आत्म-विश्वास ।

बढ़े आत्म-विश्वास, रास सन तेरह आये ।
शुभ शुभ हो हर घड़ी, जिन्दगी नित मुस्काये ।

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो ।
सुख-शान्ति सौहार्द, मंगलमय नव वर्ष हो ।।

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

प्रभावी लेखनी,
नव वर्ष मंगलमय हो,
बधाई !!

सदा ने कहा…

नए साल पर पूरी कर
मेरे मन की मुराद मौला
मेरे वतन के सीने पर
ना हो कोई फसाद मौला।
आमीन !!!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

सही बात है सभी कुछ तो अशुभ ही अशुभ हुए पडा है शुभ का मनाये ? :)

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर कामना..नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!