सोमवार, 31 दिसंबर 2012

नये साल पर शुभ का मनाये ?




"बच्चन" जी कहते है कि जो बीत गयी सो बात गयी  मै इससे ज्यादा इत्तेफाक नही रखता बीती बाते इतनी आसानी से भुला नही पाता या यो कहिये कि जेहन से जाती ही नही। बीता  वर्ष काफी आघातकारी रहा था एक उम्मीद के सहारे आगे का रास्ता तय करने को है। प्रस्तुत रचना के माध्यम से अपनी बात रखने की कोशिश करा रहा हूँ।

नए साल पर पूरी कर
मेरे मन की मुराद मौला
मेरे वतन के सीने पर
ना हो कोई फसाद मौला।

बच्चों का आँगन ना छूटे,
बूढ़े नींद चैन की सोवें
बहने चहके चिडियों सी
माओं की गोद आबाद मौला।  

रोटी कपडा मकान
हर इक  शख्स को हासिल हो
प्यार की फ़स्ल उगाये
ज़मी रहे दिल शाद मौला। 

पाप लोभ भय दूर हो
तन से मन से जन जन से
गंगा जमुना का पानी अब
और न हो बरबाद मौला।

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

अटल जी क्यो जिये जा रहे है









वह देख रहा है
अन्धे को बाटते रेवडिया
दुर्योधन और दु:शासनो मे
वह देख रहा है चीर हरण
द्रुपदसुता के निर्वीर्य रक्षको को
हाथ पर हाथ धरे
वह देख रहा है कलपते
अभिमन्यु को पीडा से मरते
वह देख रहा है

शकुनी की कुटिल चालो से
धर्मक्षेत्र को पापक्षेत्र मे बदलते
वह देख रहा है शरशैय्या पर

लेटे हुये महायुद्ध को
वह जिये जा रहा बस्स
इसी प्रतीक्षा मे
कि योगेश्वर  के साथ
पार्थ आयेगा
धर्मध्वजा के छत्र तले
हारेगा भय और अन्धेरा

अखण्ड भारतद्वीप मे फहरेगी
सत्य और न्याय की पताका,
बस्स इसी प्रतीक्षा मे
इच्छामृत्यु भीष्म जिये जा रहा है.


भारतीय राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिवस पर सभी मित्रो को बधाई.
 

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

मेरे बिखरे हुये गेसू और उलझी लटें तुम्हारी राह देखती है

 


इस कविता के माध्यम से मै रत्नावली के मन मे उठे उदगारो  को रख रहा हू जो उन्होने गोस्वामी जी के वियोग मे व्यक्त किये होंगे. यदि आप मानस का हंस पढे  होंगे तो कविता के भाव और भीने हो जायेगे.









मेरे बिखरे हुये गेसू
और उलझी लटें 
तुम्हारी राह देखती है
कि तुम आओगे
एक दिन
चाहे वह मेरे जीवन का
अंतिम दिन ही क्यो ना हो
गूंथोगे मेरा जूड़ा 
मिटाओगे मेरी सिलवटें 
माथे से लेकर मन तक
उंगलिया बालो को
हौले हौले सहलायेगी
और मै तुम्हारे सीने मे
अपना मुंह  छुपा लूंगी
फिर तुम्हे देखूंगी एकटक
देखती जाऊंगी
इस तरह
तुम्हारी छवि लिये
बन्द होंगी पलके
सदा के लिये
मै उसी एक दिन की
प्रतीक्षा मे जी रही हू
बिखरे हुये गेसू और
उलझी लटों  के साथ.