शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

रात की गोद मे चाँद आकर गिरा

 









बर्फ की आग से दग्ध चन्दन हुये 
खो गये शब्द लब थरथराते रहे,
रात की गोद मे चाँद आकर गिरा 
आंखो मे दो दिये झिलमिलाते रहे.

एक सूखी नदी फिर सरस हो गयी 
नेह की इक घटा जो बरस कर गयी,
मन पिघलते रहे भीग जाते रहे.
रात की गोद मे चाँद आकर गिरा 
आंखो मे दो दिये झिलमिलाते रहे.

मधुरस उडेलती गूंजती बांसुरी
मधुबनी तान पे झूमती पैंजनी,
गीत के बोल पर सुर सजाते रहे.
रात की गोद मे चाँद आकर गिरा 
आंखो मे दो दिये झिलमिलाते रहे.

प्राण के अर्थ अब हो गये है नये
प्रात होता नही अब किरन फूटते,
यौवन के नये अर्थ पाते रहे. 
रात की गोद मे चाँद आकर गिरा 
आंखो मे दो दिये झिलमिलाते रहे.

19 टिप्‍पणियां:

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है ...

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत लाजवाब गीत है। एक एक पद मन को हर्षित कर गया।

Archana ने कहा…

बहुत अच्छा गीत...

Amit Chandra ने कहा…

बेहद उत्तम रचना.

सादर.

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

Uttam...

Ratan singh shekhawat ने कहा…

बढ़िया रचना
Gyan Darpan

निहार रंजन ने कहा…

पवन भाई, बहुत शानदार कविता लिखते हैं आप. सुन्दर कृति.

निहार

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत .........

अनूप शुक्ल ने कहा…

बहुत प्यारा गीत है।

चांद जब रात की गोद में गिरा तो उसको छोट तो नहीं लगी।

Abhinav Chaurey ने कहा…

दूसरा अंतरा गज़ब का है. बेहद तुकांत सरस एवं गेय है.

Abhinav Chaurey ने कहा…

दूसरा अंतरा गज़ब का है. बेहद तुकांत सरस एवं गेय है.

"अनंत" अरुन शर्मा ने कहा…

वाह क्या बात है बेहद खूबसूरत रचना वाह-वाह

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना..

Reena Maurya ने कहा…

बहुत सुन्दर अति उत्तम रचना..
:-)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर भावप्रँव रचना!

सागर ने कहा…

बर्फ की आग से दग्ध चन्दन हुये
खो गये शब्द होंठ थरथराते रहे,
रात की गोद मे चाँद आकर गिरा
आंखो मे दो दिये झिलमिलाते रहे..

aapke geet me doobta main gaya,
chand jhonke pawan ke bulate rahe.,.
woqt ki daaliyon pr khile shabd wo,
umr bhar hum jinhe gungunaate rahe.,.!!

ramji ने कहा…

रात बेला खिला पवन ले के चला

शब्द खुशबू से रसभीन होते गए

क्या पता चाँद को रात ने ले लिया

रति के बादल ने आके या ढक लिया

कौन जाने किसे किस की दरकार थी

रात ने चाँद को ,पाश में ले लिया ....

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…


बर्फ की आग से दग्ध चन्दन हुए
खो गए शब्द लब थरथराते रहे
रात की गोद मे चांद आकर गिरा
आंखों में दो दिये झिलमिलाते रहे

वाऽह ! क्या बात है !

पवन जी
बहुत सुंदर गीत लिखा है …
बेहतरीन !
कमाल की खूबसूरत रचना !
बधाई !

…आपकी लेखनी से सुंदर रचनाओं का सृजन ऐसे ही होता रहे, यही कामना है …
शुभकामनाओं सहित…

ashish ने कहा…

bahut sundar likha hai ji. ekdam chuchak type. mast geet hai .