बुधवार, 12 सितंबर 2012

गर्व करिये अपने देसी होने पर गर्व करिये अपनी हिन्दी पर

इस समय हिन्दी पखवाडा चल रहा है. ऐसे मे हिन्दी चर्चा और भी प्रासंगिक हो जाती है. हिंदी भाषा के उज्ज्वल स्वरूप का भान कराने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी गुणवत्ता, क्षमता, शिल्प-कौशल और सौंदर्य का सही-सही आकलन किया जाए। यदि ऐसा किया जा सके तो सहज ही सब की समझ में यह आ जाएगा कि -
1. संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है,
2. वह सबसे अधिक सरल भाषा है,
3. वह सबसे अधिक लचीली भाषा है,
4, वह एक मात्र ऐसी भाषा है जिसके अधिकतर नियम अपवादविहीन हैं तथा
5. वह सच्चे अर्थों में विश्व भाषा बनने की पूर्ण अधिकारी है।
6. हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त देवनागरी लिपि अत्यन्त वैज्ञानिक है।
7. हिन्दी को संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन शब्दरचनासामर्थ्य विरासत में मिली है। वह देशी भाषाओं एवं अपनी बोलियों आदि से शब्द लेने में संकोच नहीं करती। अंग्रेजी के मूल शब्द लगभग १०,००० हैं, जबकि हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या ढाई लाख से भी अधिक है।
8. हिन्दी बोलने एवं समझने वाली जनता पचास करोड़ से भी अधिक है।
9. हिन्दी का साहित्य सभी दृष्टियों से समृद्ध है।
10. हिन्दी आम जनता से जुड़ी भाषा है तथा आम जनता हिन्दी से जुड़ी हुई है। हिन्दी कभी राजाश्रय की मुहताज नहीं रही।
११. भारत के स्वतंत्रता-संग्राम की वाहिका और वर्तमान में देशप्रेम का अमूर्त-वाहन
अब मै कुछ प्रश्न आप सबके सामने रख रहा हू उम्मीद है इस पर विचार करेगे
1. हिन्दी की भारत मे क्या प्रस्थिति है?
2. अंग्रेजी बोलने वाले एक बेवकूफ की भी स्थिति समाज मे उच्च क्यो मानी जाती है?
3.शुद्ध हिन्दी बोलने वाला मसखरा है? जाहिल है? गंवार है?
4. अंग्रेजी माध्यम स्कूलो तथा अंग्रेजी युक्त उच्च शिक्षा के विरुद्ध आन्दोलन हिन्दी के रहनुमा लोग करेगे?
5.हिन्दी लिपि के सिमटाव के पीछे किसका कुचक्र है?
6. हिन्दी के अपमान की सजा का क्या प्रावधान है?

सभी पाठको से अनुरोध है कि वे सोचे और मंथन करे कि इस सन्दर्भ मे क्या किया जाना चाहिये..
जय हिन्दी जय नागरी

11 टिप्‍पणियां:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बढ़िया है भाई जी |
जय हिंदी जय हिन्दुस्तान |
जय राष्ट्रीय निशान ||

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

जय हिन्दी!
जय नागरी!!

S.N SHUKLA ने कहा…

saarthak aur saamayik post, aabhar.

Dr. Ayaz Ahmad ने कहा…

आपकी बात में सार है.
यह दिल को छू गयी है.

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

हिन्दी से दूर हो विकशित भारत की परिकल्पना अधूरी है.

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

"हिंदी हमारी मात्र भाषा नहीं मातृभाषा है" इसलिए हम सभी को हिंदी भाषा का सम्मान करना चाहिए|

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

किया क्या जाए ,हिंदी सब जगह बोली जाए ,गुलामों की भाषा न समझी जाए ,हिंदी के शब्द हिंदी से ही प्रत्यय लगाकर बनाएं जैसे -विज्ञान से विज्ञानी (वैज्ञानिक लिखना ज़रूरी नहीं है ),समाज से समाजी ,समाजिक (सामाजिक क्यों लिखाजाए ?),

इतिहास से इतिहासिक ,
नाम से नामी
विद्यालय से विद्यालयीय ,
ब्लोगिंग को चिठ्ठाकारी लिखिए
ब्लोगर को चिठ्ठा कार /चिठ्ठा -रसा लिखिए .
योरप से योरपी /योरपीय
पूरब से पूरबी (पौर्बत्य क्लिष्ट है कॉफ़ी )
लेफ्ट से लेफ्टिए /वामी /वामपंथी /रक्त -रंगी
बे -वकूफ को मूढ़धन्य बोलिए (मूर्धन्य तो विद्वान होता ),काणे को काणा कहेंगे तो बुरा मान जाएगा .
जिसका चेहरा अच्छा न लगे -दुर्मुख कहिये जैसे अपने दिग्गी राजा .

जो उधारी संस्कृति की माला जपे जिसकी जड़ें हिन्दुस्तान से बाहर हों उसे कहिये -भकुवा (बधुआ बुद्धिजीवी /बौद्धिक /बुद्धिक बधुवा ),भाषा तभी पैर पसारेगी फले फूलेगी जब हम उसे अपनाएंगे .
चुप रहने वाले को कहिये -मौन सिंह
काणे को काणा न कहिये (कहिए अरे साहब आप तो सबको एक ही नजर से देखते हैं ,समता- वादी हैं .लक्षणा , .अभिधा ,व्यंजना शब्द शक्ति धारिए,हिंदी को मिसायल (मिसाइल )बनाइए .
जो अंग्रेजी से प्रहार करें उसके समक्ष नत सिर नहीं नत शिश्न भले हो जाएँ .खूब मसखरी करें .प्रयोग से भाषा बढती विकसती है .संकर शब्द बनाइए .जैसे रिमोट से रिमोटिया (रिमोटिया सरकार ),इधर एक शब्द हिन्गलिस चल पड़ा है (टी वी के चैनलिए ये ही भाषा बोलते हैं ).
(ज़ारी )

Vinay Prajapati ने कहा…

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

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गूगल हिंदी टायपिंग बॉक्स अब ब्लॉगर टिप्पणियों के पास

shreeshrakeshjain ने कहा…

अँग्रेजी डिब्बे के उस दूध की तरह है जो कितना भी पौष्टिक क्यों न हो पर माँ के दूध की जगह कभी नहीं ले सकता ।

वन्दना ने कहा…

हिन्दी ना बनी रहो बस बिन्दी
मातृभाषा का दर्ज़ा यूँ ही नही मिला तुमको
और जहाँ मातृ शब्द जुड जाता है
उससे विलग ना कुछ नज़र आता है
इस एक शब्द मे तो सारा संसार सिमट जाता है
तभी तो सृजनकार भी नतमस्तक हो जाता है
नही जरूरत तुम्हें किसी उपालम्भ की
नही जरूरत तुम्हें अपने उत्थान के लिये
कुछ भी संग्रहित करने की
क्योंकि
तुम केवल बिन्दी नहीं
भारत का गौरव हो
भारत की पहचान हो
हर भारतवासी की जान हो
इसलिये तुम अपनी पहचान खुद हो
अपना आत्मस्वाभिमान खुद हो …………