रविवार, 2 सितंबर 2012

तुम पास में ठहरो















आधी रात बीत गयी बाकी  बीत जाने दो
तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.

आयेगे और मौसम आकर चले जायेगे
पर तुम्हारे जाने से, बेमतलब हो जायेगे.

शबनमी बून्दो को  फूलो पे बरस जाने दो
रात अलसाई  है, कोई गीत गुनगुनाने  दो

गुंथी हुयी लट को खुलके बिखर जाने दो 
मन हुआ  सन्दली,  प्रीत संवर जाने दो

झीलो से उठा चन्दा होठो पे उतर आने दो
तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.

7 टिप्‍पणियां:

Shah Nawaz ने कहा…

वाह... बेहतरीन लिखा है पवन भाई...

Sunil Kumar ने कहा…

सुंदर अतिसुन्दर अच्छी लगी, बधाई

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

bahut badhiya Pawan ji ...

Amit Chandra ने कहा…

waah.... kya baat hai. bahut badiya.

paramanand ने कहा…

तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.


paramananad gupta ने कहा…

तुम पास में ठहरो, वक्त गुज़र जाने दो.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।