बुधवार, 29 अगस्त 2012

आदरणीय रवीन्द्र प्रभात जी से कुछ सवाल: तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन और इसके मायने

डिस्क्लैमर : इस पोस्ट का उद्द्येश्य किसी को ठेस पहुचाना नही वरन कुछ संशयो  का निराकरण करना है. साथ ही लेखक  अभी तक गुटनिरपेक्ष है.

बात निकली है तो फिर दूर तलक जायेगी. मुद्दे की बात है कि ये जो तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन हुआ इसके मायने और और जो इससे निष्कर्ष निकले उनकी प्रासंगिकता क्या है? 
मै बिन्दुवार चर्चा करने की कोशिश करूंगा...
1. इस सम्मेलन को अंतर्राष्ट्रीय दरज़ा कैसे मिला? उसके मानक क्या है?
2. इस समारोह के प्रायोजक और फंडिंग करने वाले कौन थे? सम्मान सूची मे शामिल कितने लोगो से समारोह के नाम पर सम्मान के नाम पर चन्दा लिया गया. इस कार्यक्रम मे जो खर्चे आये उनको  कब सार्वजनिक किया जायेगा  एवम उनके स्रोतो की जानकारी को कितने समय मे ब्लागजगत को दिया जायेगा?
3."परिकल्पना" वालो ने जो वोटिंग करायी थी उसे सार्वजनिक कब करेगे? दशक ब्लागर दम्पत्ति का उल्लेख उसमे कही नही था तो यह सम्मान क्या तुष्टीकरण के चलते जोडा गया?
4. यह प्रश्न व्यक्तिगत है जो कि श्री के के यादव जी  से है ...
यादव जी बाकी सब ठीक है किंतु एक  बात अखरती है वह है आप जैसे विद्वान पुरुष द्वारा अपने मुह मिया मिट्ठू बनने का किया जा रहा प्रयास. आप अपने फेसबुक से लेकर जितने आपके ब्लाग है आकान्क्षा जी एवम पाखी बिटिया के फेसबुक ब्लाग है सब पर खुद के "अप्रतिम" योगदानो का यशोगान करना शुरु कर देते है जो सुहाता नही. मै माटी हिन्दी पत्रिका का प्रबन्ध सम्पादक हू उसमे भी कुछ इस तरह के प्रसंग से दो चार हुआ था. रही बात मानद उपाधियो की तो वह किस आधार पर दी जाती है कुछ दिनो मे पता चल जायेगा क्तो कि हमने बल्क आर टी आई लगाई है ताकि सत्यता सामने आये लोगो के भ्रम का शमन हो. वैसे व्यक्तिगत मै आपके स्वभाव का प्रशंसक हू मेरी बातो से अगर तकलीफ हुयी हो तो क्षमाप्रार्थी हू.  आपके और आपके परिवार द्वार किये जा रहे साहित्य उन्न्यन का समाचार एक जगह से मिल जाय काफी है आजमग़ढ ब्लागरपर भी वही यदुकुल पर भी वही जबकि इन सबके माडरेटर आप ही है.
5. सार्वजनिक रूप से सम्मेलन मे अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है और पता नही किन -किन ब्लागरो के लिये "लम्पट" शब्द का प्रयोग किया गया क्या सम्मेलन एक मकसद लोगो को गाली दिलवाना था? क्या सुभाष राय पर मानहानि का मुकदमा नही दर्ज होना चाहिये?
6. छपास रोग के चलते  ब्लाग पर जो मैटर है उसे प्रिंट मीडिया मे देकर एक तरीके से ब्लाग लेखन के साथ अन्याय नही किया जा रहा है? इसके चलते लोगो से पैसे लेकर ब्लाग पर लिखी कविता कहानी को मैगजीन मे छापना या संग्रह निकाल कर खुद पैसा बनाना क्या ठीक पद्धति है? 
7. एक अति महत्वपूर्ण प्रश्न ब्लाग अकादमी के गठन के बारे मे.....
 ब्लाग लेखन साहित्य की  ही एक विधा है फरक यह है कि कागज कलम की जगह स्क्रीन और की बोर्ड का प्रयोग किया जाता है और जैसे पुस्तक को पढकर लोग चिट्ठी के द्वारा प्रतिक्रिया देते थे, यहा सीधे टीप देते है.
फिर अलग से ब्लाग अकादमी का गठन क्यो. साहित्य अकादमी जो कि मरने के कगार पर है उसे सही तरीके से चलवाने की बात क्यो नही और उसी साहित्य अकादमी के अंतर्गत ब्लाग लेखन की विधा को समृद्ध बनाने की पहल क्यो नही. क्या इसके द्वारा कुछ बडी महत्वाकाक्षाओ की पूर्ति की उम्मीद मे आयोजक थे या अब भी है?
उम्मीद है कि  सम्मेलन के सन्योजक आदरणीय रवीन्द्र प्रभात जी और ज़ाकिर जी इन प्रश्नो का निराकरण करके ब्लागजगत और मुझे सही तथ्यो से अवगत करायेगे.
प्रतीक्षा मे
डा. पवन कुमार मिश्र ,कानपुर्




52 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

तीर की तरह चुभते भेदते सवाल ...उत्तर जानने की इच्छा रहेगी । दोबारा आउंगा

बेनामी ने कहा…

6. छपास रोग के चलते ब्लाग पर जो मैटर है उसे प्रिंट मीडिया मे देकर एक तरीके से ब्लाग लेखन के साथ अन्याय नही किया जा रहा है? इसके चलते लोगो से पैसे लेकर ब्लाग पर लिखी कविता कहानी को मैगजीन मे छापना या संग्रह निकाल कर खुद पैसा बनाना क्या ठीक पद्धति है?



ब्लोग्स इन मीडिया को पुरूस्कार दिया गया हैं
जबकी वहाँ क्या हैं केवल कतरने , चोरी की हुई पोस्टो की जो अखबारों में छपी हैं .
जब चोरी से छपने पर भी लेखक खुश हैं तो फिर सब सवाल बेकार हैं
सब पहले अपने अन्दर झांके

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

नाम न लिखना बेनामी नही बेईमानी है कृपया बताये कि आप कौन है?

Abhinav Chaurey ने कहा…

पवन जी मुझे मामले के बारे में ज्यादा पता नहीं है पर सवाल बड़े स्वाभाविक और ज्वलंत हैं. काफी सभ्यता से अपना पक्ष रखा है आपने.

छोटे ने कहा…

पवन जी! आपके सवाल बिलकुल सही हैं. इनका जवाब दिया जाना चाहिए. पता नहीं क्यों मुझे लग रहा है कि ब्लॉग जगत में मठाधीशी की बुनियाद डाली जा रही है.

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

सवाल उठाना कोई ग़ुनाह नहीं है बशर्ते उनकी नीयत ठीक हो ।
...अगर किसी को लगता है कि परिकल्पना का तरीका सही नहीं था तो वह अपनी तरह से ऐसे आयोजन के लिए स्वतन्त्र है.
पुरस्कार पाने वाले ही केवल उच्च कोटि के नहीं हैं ।

Harshkant tripathi ने कहा…

जायज सवाल लेकिन अबतक कोई समुचित उत्तर नही. मै कहता हूँ कि आपने गलत किया और आप ये कहते है कि गलत किया है तो खुद सही कर के दिखाओ?????? सीधी बात आपने जो किया, जैसे किया सब सही है और आप नही सुधरने वाले????????

Ratan singh shekhawat ने कहा…

मेरी नजर में ऐसे सवाल उठाने की कोई जरुरत ही नहीं|
१-कोई भी इस तरह के आयोजन कर सकता है आप भी करिए कौन मना करता है?
२-हिसाब भी हम तब मांगे जब हमसे कोई सहायता राशी ली हो| जिन्होंने दी वे अपने आप हिसाब ले लेंगे और यदि सम्मलेन व्यक्तिगत खर्च पर हुआ है तब भी कोई प्रश्न जायज नहीं|
३-अंतर्राष्ट्रीय मानक का दर्जा इसलिए कि-कुछ विदेश में रहने वाले ब्लोगर भी सम्मिलित हुए तो अंतर्राष्ट्रीय मानक अपने आप तय हो गए|
४-सम्मान के लिए कोई भी आयोजक कभी भी सम्मान के लिए सूचि बढ़ा सकता है इसमें काहे का एतराज ?

शेखचिल्ली का बाप ने कहा…

देखो,
पुरस्कार तो हमारे शेख़चिल्ली को भी नहीं दिया लेकिन फिर भी हम दोनो को कोई शिकायत नही है.
हाँ, बस हमारा गध्हा थोड़ा सा उदास है.

ईनाम अपना , आदमी उनके अपने और अब तो माल भी अपना ही हो गया . जिसकी जेब से गया , उसे ग़म नहीं तो हमारी बला से.

शेखचिल्ली का बाप ने कहा…

... वैसे राज़ की बातें सरे आम नहीं पूछी जातीं.

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

@ Ratan singh shekhawat जी आप तो उपयोगितावादी जर्मी बेंथम की भाषा बोलने लगे. ब्लागिंग के सामाजिक मायने हुआ करते है यह नितांत व्यक्तिगत मसला नही है. दूसरी महत्वपूर्ण बात जो आप गोल कर गये कि ब्लाग अकेडेमी की जरूरत और ब्लाग का एक विधा होने का सवाल. साहित्य को धीमी मौत की ओर धकेलने के प्रयासो को अप्रिसियेट नही करना चाहिये.

SURYABHAN CHAUDHARY ने कहा…

घोडा घास खा गया मिसिर जी. अब ऊ घास खा के एक्कै जगह नही रुकने वाला. रही बात बलाग अकादमी की तो घोडे को हुआ भी हरियर हरियर दिख रहा है. वैसे एक बिन मांगे सलाह है कि कौनो न कौनो गुट मे सामिल होइ जाओ अकेले चलने मे फायदा नाही. आपने अरविन्द मिसिर और ज़ाकिर वाले विवाद मे भी टंगडी मारी थी अब ज़ाकिर के कार्यक्रम मे टंगडी मार दी. ई गुरु चेला एक्कै है. आप पूछते रहो सवाल रवीन्द्र जी पक्के कांग्रेसी है
" हजार सवालो से मेरी खामोशी अच्छी
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी"

भवदीय सूर्यभान चौधरी इटौवा वाले

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

अरुण चन्द्र राय जी के हवाले से......

जानकीपुल एक ब्लॉग है. जिसके ७२२ सदस्य हैं. २ लाख के करीब पेज व्यू हैं. हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के स्थापित नाम पूरी प्रतिबद्धता से जुड़े हैं. नियमित उपडेट होता है यह ब्लॉग. और जब ब्लॉग पर पुरस्कार देने की बात होती है तो यह ब्लॉग कहीं नहीं है. यह बताता है कि परिकल्पना पुरस्कार फार्स है.

३५२ सदस्य. नियमित गीत. हर गीत पर टिप्पणी का शतक. २०११ में ५२ उत्कृष्ट गीत. २०१२ में गीतों का संकलन भी प्रकाशित जिसका विमोचन हिंदी नवगीत के जनक देवेन्द्र शर्मा इन्द्र (गीत के नामवर ) ने किया. परिकल्पना पुरस्कार में कहीं भी नहीं. यह भी बताता है कि यह पुरस्कार फार्स है.

९८८ सदस्य. २०११ में ३०० से अधिक उत्कृष्ट विदेशी कविताओं का अनुवाद. परिकल्पना पुरस्कार में कहीं भी नहीं.

मनोज जी के तीन ब्लॉग… मनोज, राजभाषा हिंदी, विचार… तीनो ब्लॉग पर नियमित अपडेट. तीनो ब्लॉग पर उत्कृष्ट साहित्य, रिपोर्ट, कविता और गीत. खास तौर पर विचार ब्लॉग पर गाँधी जी से सम्बंधित अनूठी जानकारियां. सूफी पर बढ़िया पोस्ट. परिकल्पना पुरस्कार के किसी श्रेणी में कहीं भी नहीं.

हिंदी के स्थापित युवा कवि और अशोक पांडये का ब्लॉग कबाडखाना और असुविधा, बढ़िया साहित्य और विचार. परिकल्पना की कल्पना में कहीं भी नहीं.

और यह सूची लम्बी है…..
..
फिर सवाल उठाता है कि ब्लॉग में परिकल्पना पुरस्कार की क्या साख है. न्यू मीडिया अभी शैशव अवस्था में है. हिंदी ब्लॉग भी. ऐसे में इस मीडिया को पारंपरिक मीडिया का विकल्प बनाना है…लेकिन इसमें जो प्रवृतियाँ आ गई हैं या आ रही हैं वे पारंपरिक मीडिया वाली ही हैं.

Shekhar Suman ने कहा…

भैया यहाँ ऑस्कर पुरस्कार तक को मैं निरपेक्ष नहीं मानता, आप इसकी बात करते हैं.. जिसको मिलना है मिले... हमें क्या... हमारा थोड़े न कुछ गया.. कुछ लोगों ने पुरस्कार लिया, कुछ लोगों के नाम अखबार में आ गए, बस भाई वो खुश...

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

बात सापेक्षता या निरपेक्षत की नही बात साहित्य के जीने मरने की है जिसे लोग अभी खुमारी मे नही समझ पा रहे है ब्लाग लेखन साहित्य की ही एक विधा है अलग से अकादमी बनाने की कोई जरूरत नही.यह नितांत लाभोन्मादी प्रयास है वो भी राममनोहर लोहिया. आप समझिये अभी बसपा सरकार होती तो लोहिया की जगह अम्बेडकर या कांशीराम ले लेते कल को फेसबुक यूजर कहेगे कि जुकेरबर्ग फेसबुक अकादमी बननी चाहिये अंतर्राष्ट्रीय फेसबुक पुरस्कार सम्मेलन या गूगल प्लस सम्मेलन या आरकुट सम्मेल होगा तो इससे आप सहमत होंगे? क्या फेसबुक अकादमी भी बनवाने के प्रयास होंगे? सवाल लाजिमी है इनके जवाब हमे ढूंढने होंगे

वन्दना ने कहा…

सवाल लाज़िमी हैं और अरुण चन्द्र राय का विश्लेषण भी तार्किक है ………हर बात पर विचार किया जाना चाहिये।

DrZakir Ali Rajnish ने कहा…

:)
:) :)
:) :) :)
............
आश्‍चर्यजनक किन्‍तु सत्‍य! हिन्‍दी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन : अंग्रेजी अखबार के पहले पन्‍ने की पहली खबर!

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

ज़ाकिर भाई आपका इतनी मुसकान कातिल है:)

बेनामी ने कहा…

Breast Cancer वाली कविताओं को अश्लील कहना भी सार्थक नहीं था, वो कौन मूर्ख था मुझे पता नहीं. एक महामूर्ख तो अपने बेटे की ही तारीफ़ करता रहा की उसका बेटा कितना जागरूक है और बाकी कितने मूर्ख| लम्पट कहने से पूर्व खुद कितने बड़े लम्पट थे खुद को साहित्यकार कहने वाले| साहित्य क्या होता है उनको मालूम भी है| :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सम्मान कम अपमान अधिक!
आयोजन मात्र तुष्टिकरण के लिए था।
मुझे तो रणधीर सिंह सुमन के अतिरिक्त कोई अन्य समर्पण की भावना से कार्यरत नहीं दिखा!

रचना ने कहा…



LUCKNOW: Hindi bloggers are now getting their place in the sun. Drawn from India and the rest of the world, they will be honoured in Lucknow on August 27 for popularising the language in cyberspace.

Parikalpana, a bloggers' organisation, would confer the awards on 51 persons during an international bloggers' conclave at the Rai Umanath Bali auditorium here, said Ravindra Prabhat, the organising committee's convenor.

The participants, some of whom also blog in English and Urdu, have made Hindi popular in the United States, the United Kingdom, the United Arab Emirates, Canada, Germany and Mauritius.

"The blogger of the decade prize would be conferred on Bhopal's Ravi Ratlami who has a huge following," added Prabhat, a noted Hindi blogger.

The NRI bloggers who have confirmed their participation include Dr Poornima Burman, editor of Abhivyakti (an online book in Hindi published from Sharjah) and the Toronto-based Samir Lal 'Samir' who writes blogs in Hindi and English.

London-based journalist Shikha Varshneya, a regular blogger who has written a book 'Russia in Memory', is also expected to attend the ceremony. The others include Sudha Bhargava (USA), Anita Kapoor (London), Baboosha Kohli (London), Mukesh Kumar Sinha (Jharkhand) and Rae Bareli's Santosh Trivedi, an engineer who left his job with the Uttar Pradesh Power Corporation Ltd, for blogging.

Avinash Vachaspati, the author of the first book on Hindi blogging in India and DS Pawala (Bokaro), the first to start Hindi blogging in India would also be there as would multi-lingual blogger Ismat Zaidi, who writes in Hindi, Urdu and English. Her Urdu ghazals are a hit on the web.

Asgar Wajahat and Shesh Narayan Singh are also expected to participate, but a confirmation is awaited.

The bloggers would discuss the future of the new media, its contribution to the society, especially the future of Hindi blogging and its role in the days to come.

---
this is the news in ht dated 8th august lucknow edition

santosh trevedi left his job for bloging REALLY ???

avinash vachaspati wrote the first book on hindi bloging REALLY ??

DS Pawala (Bokaro), the first to start Hindi blogging in India REALLY ??


DONT YOU THINK ITS HIGH TIME WE FIRST PUT THE FACTS RIGHT

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

इंतहा हो गयी इंतज़ार की. क्या तथ्यो को मैनुपुलेट किया जा रहा है? या फिर जवाबो को मैनेज किया जा रहा है!
@रचना...कहने को तो मनमोहन सिह देश के मुखिया है ही पर वास्तव मे मुखिया कोई और है.

जो है सो है नही जो नही है सो है. क्या किया जाये

Satish Chandra Satyarthi ने कहा…

ई सम्मेलन का तो पूरा रायता फ़ैल गया है हिन्दी ब्लॉगिंग में... जहाँ देखो सम्मेलन सम्मान... कोई अच्छा बोल रहा है.. कोई खराब... भाई मिल-बैठके तार्किक तरीके से सलटाया जाए मामले को... उधर से भी लोग सिर्फ मुस्कुरा के चले जा रहे हैं... :)

मनोज कुमार ने कहा…

प्रश्न विचारणीय है। अरुण जी का विशेषण और रचना जी का विचार - सब मिलाकर बहुत कुछ जानने को शेष रह जाता है।
मैं भी झा जी की तरह प्रतीक्षा में हूं।

मनोज कुमार ने कहा…

प्रश्न विचारणीय है। अरुण जी का विशेषण और रचना जी का विचार - सब मिलाकर बहुत कुछ जानने को शेष रह जाता है।
मैं भी झा जी की तरह प्रतीक्षा में हूं।

रचना ने कहा…

mae jannaa chahtii hun ki news papaer ko feed kisnae dii aur 8 tarikh kae is akhbaar ki feed par itnae badae sammalen me koi charcha kyun nhi hui

बेनामी ने कहा…

खिसियानी बिल्‍ली की तरह ब्‍लॉग आयोजनों पर सवाल उठाने वाले मा0 शुकुल महाराज से निवेदन है कि पाबला जी द्वारा चर्चा में लाए गये उनके चेले के ब्‍लॉग घोटाले पर भी अपना प्रवचन देने की कृपा करें।

चर्चित संस्था 'कैग' ने वर्धा के अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में अनियमितता और घोटाले का पर्दाफ़ाश किया है

यह वही हिंदी विश्वविद्यालय है जिसमें उत्तर प्रदेश के एक लेखाधिकारी, जो हिंदी ब्लॉगर भी हैं, प्रतिनियुक्ति पर आए थे लेकिन समय पूर्व ही 'भाग' खड़े हुए!

इन्हीं के ब्लॉग को सरकारी अनुदान दिया गया और इसी विश्वविद्यालय ने सरकारी खर्चे पर ब्लॉगर बुला कर, ब्लॉगर सम्मेलन भी करवाया गया था

बेनामी ने कहा…

ब्‍लॉग घोटाले का विवरण यहां उपलब्‍ध है: http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-08-29/nagpur/33474958_1_special-audit-audit-report-cag

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

जैसा कि मैने पहले कहा था कि बेनामी टिप्पणी बेईमानी होती है और मुझे तो पता ही चल जाता है कि बेनामी जी कौन है. पहले बेनामी के माध्यम से रचना जी ने कमेंट दिये अब जो दे रहा है उसको भी देख रहा हू. बेनामी से टिप्पणी की नैतिकता खतम हो जाती है आप सही बात भी कहते है तो उसकी गम्भीरता खत्म हो जाती है. खैर इशारा शायद सिद्धार्थ जी की ओर है. ये रपट मैने देखी किंतु इसका मेरे प्रश्नो से कोई लेना नही है. मान भी लिया जाय कि घोटाला हुआ तो उसके आधार पर आप लोगो को एक और घोटाला करने की अनुमति मिल जाय यह कोई बात नही होती.
चौधरी जी ने सही कहा कि यहा भी कांग्रेसी संस्क़ृति के अनुयायी है जो आरोप प्रत्यारोप के सहारे मूल मुद्दे की बात को भटकाने की बात करते है. मुझे सवालो के जवाब चाहिये बस्स.

मनोज पाण्डेय ने कहा…

रवीन्द्र जी जैसे सुलझे हुये व्यक्तित्व से इस प्रकार के चूतियापा वाले प्रश्न क्यों पूछते हो, ऐसे प्रश्नों के उत्तर तो कोई भी चिरकुट बता देगा। चलिये हम्म ही बताये देते हैं चुना लगाके ।
पहले प्रश्न का उत्तर-
डॉक्टर की डिग्री ले ली और नर्सरी का प्रश्न पूछते हो मियां ! अमा मियां इतना भी नहीं जानते कि जैसे अंतरजिला, अंतराज्यीय, राष्ट्रीय उसी प्रकार अंतर्राष्ट्रीय । मियां नसुरुद्दीन के कुछ नुस्खे सीख लो आगे प्रश्न पूछने मे काम आएंगे ।
दूसरे प्रश्न का उत्तर -
प्रायोजक और फंडिंग दोनों प्रभात जी की आमदनी के कुछ हिस्से हैं, यानि रवीन्द्र जी ने लंगोटी पहन कर फाग खेला है। नहीं समझे, चलो नर्सरी क्लास के बच्चों की तरह समझाता हूँ कि रवीन्द्र जी ने घर फूँक तमाशा किया है यानि पूरा खर्च व्यक्तिगत ।
सम्मान के नाम पर यदि किसी ने चन्दा दिया हो, तो कहे तो सही । बकबकाने से काम नहीं चलेगा मिसिर जी, जेनरल नौलेज बढ़ाइए या फिर शंखपुष्पी पीजिए याददाश्त दुरुस्त हो जाएगी ।
तीसरे प्रश्न का उत्तर-
परिकल्पना ने जिसे देना था सम्मान दे दिया सार्वजनिक मंच से, अब बचा ही क्या है.....एक बार परिकल्पना पर घूम आओ सारी सूची मिल जावेगी ।
दशक के ब्लॉगर दंपत्ति का सम्मान भी 12 मई को ही सार्वजनिक हो गयी थी, पढ़ोगे तभी न जानोगे । बहुत पहले एक गाना खूब चर्चा मे रहा "पप्पू कांट डांस.......!"
रही ब्लॉग अकादमी खोलने के प्रस्ताव का, तो यह अभी तक केवल प्रस्ताव है, यदि कुबत हो तो बनाने ही मत दो ......और इससे बड़ा कार्यक्रम कराने की क्षमता हो तो जौनपुर या कानपुर मे ही करालों बच्चा ।

मनोज पाण्डेय ने कहा…

मेरी टिप्पणी डिलीट क्यों कर दिये मियां, ज्यादा चुभ गयी थी क्या ?

मनोज पाण्डेय ने कहा…

मेरी टिप्पणी डिलीट क्यों कर दिये मियां, ज्यादा चुभ गयी थी क्या ?

मनोज पाण्डेय ने कहा…

रवीन्द्र जी जैसे सुलझे हुये व्यक्तित्व से इस प्रकार के चूतियापा वाले प्रश्न क्यों पूछते हो, ऐसे प्रश्नों के उत्तर तो कोई भी चिरकुट बता देगा। चलिये हम्म ही बताये देते हैं चुना लगाके ।
पहले प्रश्न का उत्तर-
डॉक्टर की डिग्री ले ली और नर्सरी का प्रश्न पूछते हो मियां ! अमा मियां इतना भी नहीं जानते कि जैसे अंतरजिला, अंतराज्यीय, राष्ट्रीय उसी प्रकार अंतर्राष्ट्रीय । मियां नसुरुद्दीन के कुछ नुस्खे सीख लो आगे प्रश्न पूछने मे काम आएंगे ।
दूसरे प्रश्न का उत्तर -
प्रायोजक और फंडिंग दोनों प्रभात जी की आमदनी के कुछ हिस्से हैं, यानि रवीन्द्र जी ने लंगोटी पहन कर फाग खेला है। नहीं समझे, चलो नर्सरी क्लास के बच्चों की तरह समझाता हूँ कि रवीन्द्र जी ने घर फूँक तमाशा किया है यानि पूरा खर्च व्यक्तिगत ।
सम्मान के नाम पर यदि किसी ने चन्दा दिया हो, तो कहे तो सही । बकबकाने से काम नहीं चलेगा मिसिर जी, जेनरल नौलेज बढ़ाइए या फिर शंखपुष्पी पीजिए याददाश्त दुरुस्त हो जाएगी ।
तीसरे प्रश्न का उत्तर-
परिकल्पना ने जिसे देना था सम्मान दे दिया सार्वजनिक मंच से, अब बचा ही क्या है.....एक बार परिकल्पना पर घूम आओ सारी सूची मिल जावेगी ।
दशक के ब्लॉगर दंपत्ति का सम्मान भी 12 मई को ही सार्वजनिक हो गयी थी, पढ़ोगे तभी न जानोगे । बहुत पहले एक गाना खूब चर्चा मे रहा "पप्पू कांट डांस.......!"
रही ब्लॉग अकादमी खोलने के प्रस्ताव का, तो यह अभी तक केवल प्रस्ताव है, यदि कुबत हो तो बनाने ही मत दो ......और इससे बड़ा कार्यक्रम कराने की क्षमता हो तो जौनपुर या कानपुर मे ही करालों बच्चा ।

मनोज पाण्डेय ने कहा…

रवीन्द्र जी जैसे सुलझे हुये व्यक्तित्व से इस प्रकार के चूतियापा वाले प्रश्न क्यों पूछते हो, ऐसे प्रश्नों के उत्तर तो कोई भी चिरकुट बता देगा। चलिये हम्म ही बताये देते हैं चुना लगाके ।
पहले प्रश्न का उत्तर-
डॉक्टर की डिग्री ले ली और नर्सरी का प्रश्न पूछते हो मियां ! अमा मियां इतना भी नहीं जानते कि जैसे अंतरजिला, अंतराज्यीय, राष्ट्रीय उसी प्रकार अंतर्राष्ट्रीय । मियां नसुरुद्दीन के कुछ नुस्खे सीख लो आगे प्रश्न पूछने मे काम आएंगे ।
दूसरे प्रश्न का उत्तर -
प्रायोजक और फंडिंग दोनों प्रभात जी की आमदनी के कुछ हिस्से हैं, यानि रवीन्द्र जी ने लंगोटी पहन कर फाग खेला है। नहीं समझे, चलो नर्सरी क्लास के बच्चों की तरह समझाता हूँ कि रवीन्द्र जी ने घर फूँक तमाशा किया है यानि पूरा खर्च व्यक्तिगत ।
सम्मान के नाम पर यदि किसी ने चन्दा दिया हो, तो कहे तो सही । बकबकाने से काम नहीं चलेगा मिसिर जी, जेनरल नौलेज बढ़ाइए या फिर शंखपुष्पी पीजिए याददाश्त दुरुस्त हो जाएगी ।
तीसरे प्रश्न का उत्तर-
परिकल्पना ने जिसे देना था सम्मान दे दिया सार्वजनिक मंच से, अब बचा ही क्या है.....एक बार परिकल्पना पर घूम आओ सारी सूची मिल जावेगी ।
दशक के ब्लॉगर दंपत्ति का सम्मान भी 12 मई को ही सार्वजनिक हो गयी थी, पढ़ोगे तभी न जानोगे । बहुत पहले एक गाना खूब चर्चा मे रहा "पप्पू कांट डांस.......!"
रही ब्लॉग अकादमी खोलने के प्रस्ताव का, तो यह अभी तक केवल प्रस्ताव है, यदि कुबत हो तो बनाने ही मत दो ......और इससे बड़ा कार्यक्रम कराने की क्षमता हो तो जौनपुर या कानपुर मे ही करालों बच्चा ।

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

@मनोज पाण्डेय जी, ऐसे प्रश्नों के उत्तर तो कोई भी चिरकुट बता देगा। मैने मान लिया कि आप चिरकुट है बधाई हो.वैसे आपके सांग सेलेक्शन से आपकी चिरकुटई निखर के सामने आ रही है. पुनश्च बधाई

मनोज पाण्डेय ने कहा…

वैसे कोई चिरकुट ही चिरकुट की भाषा समझ सकता है, चलो किसी चिरकुट को चिरकुट तो मिला ।

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

सही बात तभी रवीन्द्र जी की बातो का निहितार्थ आप खूब समझे. ईश्वर से कामना है कि आपका कुनबा ऐसे ही फलता फूलता रहे. भविष्य मे चिरकुटई सम्मान आपको मिले शुभकामनाओ के साथ....

अरविन्द शर्मा ने कहा…

डाक्टरी धरी की धरी रह गयी और पछुवा पवन को ज़ोर का झटका धीरे से लगा गए पाण्डेय जी, क्या बात है ?

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

शर्मा जी मुद्दे की बात करो.

अरविन्द शर्मा ने कहा…

मुद्दे रहे कहाँ जो मुद्दे की बात की जाये मिसिर जी । आपके पोस्ट मे मुद्दे कम दुराग्रह ज्यादा है ....शुकुल जी के चेला जो ठहरे ।

ब्रजेश सिन्हा ने कहा…

मेरी नजर में ऐसे सवाल उठाने की कोई जरुरत ही नहीं|

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

अरविन्द शर्मा जी मै फिर कह रहा हू कि चश्मा ठीक करवा लीजिये. आप चेलाई चाटुकारी करते रहो. शुकुल जी और हमारे बीच वही सम्बन्ध है जो अरविन्द जी और मुझमे जो जाकिर भाई और मुझमे जो आप और मुझमे. वैसे भी मै आप जैसे फरजी और पालित पोषित तथाकथित ब्लागरो को ज्यादा महत्व नही देता.

अरविन्द शर्मा ने कहा…

मैं तो चश्मा पहनता ही नहीं,नज़र अभी ठीक-ठाक है । चश्मा तो आप पहनते हैं मिसिर जी, संभव हो तो नंबर बदलवा लीजिये, पढ़ने पढ़ाने मे काम आएंगे ।

अरविन्द शर्मा ने कहा…

मैं तो चश्मा पहनता ही नहीं,नज़र अभी ठीक-ठाक है । चश्मा तो आप पहनते हैं मिसिर जी, संभव हो तो नंबर बदलवा लीजिये, पढ़ने पढ़ाने मे काम आएंगे ।

अरविन्द शर्मा ने कहा…

मैं तो चश्मा पहनता ही नहीं,नज़र अभी ठीक-ठाक है । चश्मा तो आप पहनते हैं मिसिर जी, संभव हो तो नंबर बदलवा लीजिये, पढ़ने पढ़ाने मे काम आएंगे ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (01-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

मिश्रा जी यह बहुत अच्छी बात है कि आप को बेनामी को पकड़ने की विधि मालूम है ... पर भैया जी ब्लॉग पर बेनामी का विकल्प काहे खोले हुये हो ... इतना सारे सार्थक सवाल उठा रहे है आप एक सार्थक काम और कीजिये सब से पहले बेनामी का विकल्प बंद कीजिये अपने ब्लॉग पर ... इसे मात्र मेरा अनुरोध समझे !

सादर !

शिवम् मिश्रा ने कहा…

कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ - ब्लॉग बुलेटिन ब्लॉग जगत मे क्या चल रहा है उस को ब्लॉग जगत की पोस्टों के माध्यम से ही आप तक हम पहुँचते है ... आज आपकी यह पोस्ट भी इस प्रयास मे हमारा साथ दे रही है ... आपको सादर आभार !

DR. PAWAN K. MISHRA ने कहा…

@ शिवम मिश्रा जी बेनामी टिप्पणी से रात्रिचर प्राणी भी टिप्पणी कर सकते है बुरके वालो के लिये भी तो जगह होनी चाहिये लोकतंत्र मे. बाकी अरविन्द शर्मा ब्रजेश सिन्हा जैसे लोग नाम वाले होकर भी बेनामी है वही "नामधारी बेनामी " जी बेनामी होकर सक्रिय ब्लागर है. सबको खेलने कूदने दीजिये.

Arvind Mishra ने कहा…

टैक्स पेयर्स के खून पसीने की गाढ़ी कमाई लगी होती इसमें तो ये सवाल बहुत मौजू थे .....

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

पवन कॉलेज बंद चल रहा है क्या?
कुछ प्रश्न अनुत्तरित होते हैं और अनुत्तरित ही रहते हैं . उनके अनुत्तरित रहने और रखने में ही गरिमा होती है सो समझ लो कि .......

सत्य गौतम ने कहा…

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यह पोस्ट पूर्व में भी पढी परन्तु कोई टिप्पणी न दी.
अब आपके विरोध का स्तर देखा कि वैधानिक कार्यवाही की बात समारोह का आयोजक खुद कर रहा है और उसका साथी अपने कमेंट्स में इस ब्लॉग पर आपको गाली दे रहा है और आपकी खिल्ली उड़ा रहा है . इसी ब्लॉग पर नहीं वरण परिकल्पना पर भी.
इसकी मैं निंदा करता हूँ .
आपके लिए विशेष सुझाव है कि अपने ब्लॉग और परिलापना ले ब्लॉग पर आपके प्रति कहे गए अपशब्दों का स्क्रीन फोटो ले लें. इनके कमेंट्स की ईमेल्स को सुरक्षित कर लें.
ये हाथ जड़कर प्रणाम करेंगे और जीवन में कभी आपको तो क्या किसी को भी नहीं धमकाएंगे.

सम्मान आयोजक के ब्लॉग पर मैं इस कृत्य की भर्त्सना करके इधर आया हूँ.

तडफ बता रही है कि आपका तीर ही सबसे मारक बैठा.
प्रश्न उचित हैं . जो समूह को साथ लेकर चले उनसे वोट मांगे . उससे प्रश्न करना उसकी प्रतिष्ठा पर हमला करना नहीं हुआ करता.