बुधवार, 29 अगस्त 2012

आदरणीय रवीन्द्र प्रभात जी से कुछ सवाल: तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन और इसके मायने

डिस्क्लैमर : इस पोस्ट का उद्द्येश्य किसी को ठेस पहुचाना नही वरन कुछ संशयो  का निराकरण करना है. साथ ही लेखक  अभी तक गुटनिरपेक्ष है.

बात निकली है तो फिर दूर तलक जायेगी. मुद्दे की बात है कि ये जो तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन हुआ इसके मायने और और जो इससे निष्कर्ष निकले उनकी प्रासंगिकता क्या है? 
मै बिन्दुवार चर्चा करने की कोशिश करूंगा...
1. इस सम्मेलन को अंतर्राष्ट्रीय दरज़ा कैसे मिला? उसके मानक क्या है?
2. इस समारोह के प्रायोजक और फंडिंग करने वाले कौन थे? सम्मान सूची मे शामिल कितने लोगो से समारोह के नाम पर सम्मान के नाम पर चन्दा लिया गया. इस कार्यक्रम मे जो खर्चे आये उनको  कब सार्वजनिक किया जायेगा  एवम उनके स्रोतो की जानकारी को कितने समय मे ब्लागजगत को दिया जायेगा?
3."परिकल्पना" वालो ने जो वोटिंग करायी थी उसे सार्वजनिक कब करेगे? दशक ब्लागर दम्पत्ति का उल्लेख उसमे कही नही था तो यह सम्मान क्या तुष्टीकरण के चलते जोडा गया?
4. यह प्रश्न व्यक्तिगत है जो कि श्री के के यादव जी  से है ...
यादव जी बाकी सब ठीक है किंतु एक  बात अखरती है वह है आप जैसे विद्वान पुरुष द्वारा अपने मुह मिया मिट्ठू बनने का किया जा रहा प्रयास. आप अपने फेसबुक से लेकर जितने आपके ब्लाग है आकान्क्षा जी एवम पाखी बिटिया के फेसबुक ब्लाग है सब पर खुद के "अप्रतिम" योगदानो का यशोगान करना शुरु कर देते है जो सुहाता नही. मै माटी हिन्दी पत्रिका का प्रबन्ध सम्पादक हू उसमे भी कुछ इस तरह के प्रसंग से दो चार हुआ था. रही बात मानद उपाधियो की तो वह किस आधार पर दी जाती है कुछ दिनो मे पता चल जायेगा क्तो कि हमने बल्क आर टी आई लगाई है ताकि सत्यता सामने आये लोगो के भ्रम का शमन हो. वैसे व्यक्तिगत मै आपके स्वभाव का प्रशंसक हू मेरी बातो से अगर तकलीफ हुयी हो तो क्षमाप्रार्थी हू.  आपके और आपके परिवार द्वार किये जा रहे साहित्य उन्न्यन का समाचार एक जगह से मिल जाय काफी है आजमग़ढ ब्लागरपर भी वही यदुकुल पर भी वही जबकि इन सबके माडरेटर आप ही है.
5. सार्वजनिक रूप से सम्मेलन मे अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है और पता नही किन -किन ब्लागरो के लिये "लम्पट" शब्द का प्रयोग किया गया क्या सम्मेलन एक मकसद लोगो को गाली दिलवाना था? क्या सुभाष राय पर मानहानि का मुकदमा नही दर्ज होना चाहिये?
6. छपास रोग के चलते  ब्लाग पर जो मैटर है उसे प्रिंट मीडिया मे देकर एक तरीके से ब्लाग लेखन के साथ अन्याय नही किया जा रहा है? इसके चलते लोगो से पैसे लेकर ब्लाग पर लिखी कविता कहानी को मैगजीन मे छापना या संग्रह निकाल कर खुद पैसा बनाना क्या ठीक पद्धति है? 
7. एक अति महत्वपूर्ण प्रश्न ब्लाग अकादमी के गठन के बारे मे.....
 ब्लाग लेखन साहित्य की  ही एक विधा है फरक यह है कि कागज कलम की जगह स्क्रीन और की बोर्ड का प्रयोग किया जाता है और जैसे पुस्तक को पढकर लोग चिट्ठी के द्वारा प्रतिक्रिया देते थे, यहा सीधे टीप देते है.
फिर अलग से ब्लाग अकादमी का गठन क्यो. साहित्य अकादमी जो कि मरने के कगार पर है उसे सही तरीके से चलवाने की बात क्यो नही और उसी साहित्य अकादमी के अंतर्गत ब्लाग लेखन की विधा को समृद्ध बनाने की पहल क्यो नही. क्या इसके द्वारा कुछ बडी महत्वाकाक्षाओ की पूर्ति की उम्मीद मे आयोजक थे या अब भी है?
उम्मीद है कि  सम्मेलन के सन्योजक आदरणीय रवीन्द्र प्रभात जी और ज़ाकिर जी इन प्रश्नो का निराकरण करके ब्लागजगत और मुझे सही तथ्यो से अवगत करायेगे.
प्रतीक्षा मे
डा. पवन कुमार मिश्र ,कानपुर्