सोमवार, 2 जुलाई 2012

...तुम भी कही भीगती होगी:












सावन की सीली हवाएं 
जब तन से मेरे टकराती है,
तुम्हारे कोमल छुअन की यादें
मुझे  पुकार जाती है.

धुली और पनियल सडको से
काफी हाउस आना,
घुमड़ते कारे बादलो की
फुआरों में भीज जाना.

तुम्हारे बालो का गीलापन
मेरे कंधे पर होता था,
सारा रेगिस्तान मेरा
उस पल को गायब होता था.

तुम्हारे साथ बिताई हुयी
हर शाम याद आती है,
जिस बात पर हंसी थी तुम
वो बात याद आती है.

आगे सावन बरसे ना बरसे
लेकिन बारिश लम्बी होगी,
मेरी आँखों के बादल से
तुम भी कही भीगती होगी.



14 टिप्‍पणियां:

Yashpal Sihag ने कहा…

आगे सावन बरसे ना बरसे
लेकिन बारिश लम्बी होगी,
मेरी आँखों के बादल से
तुम भी कही भीगती होगी.

khub... bahut khoob....

Tarkeshwar Giri ने कहा…

So nice

Tarkeshwar Giri ने कहा…

So nice

Tarkeshwar Giri ने कहा…

So nice

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

रचना बहुत सुन्दर है मगर बरसात के मौसम में बारिश नहीं हो रही है।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट ।
आभार भाई जी ।।

Pallavi saxena ने कहा…

अनुपम भाव संयोजन से सजी भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...........

Ritesh ने कहा…

dhuli paniyal sadako pe kaafi house aana!!! waah..atyand sundar..

निर्मला कपिला ने कहा…

मेरी आँखों के बादल से
तुम भी कही भीगती होगी.
दिल को छू गयी ये पंक्तियाँ। शुभकामनायें।

अरविन्द शुक्ल ने कहा…

उत्कृष्ट अभिव्यक्ति

वाणी गीत ने कहा…

मेरी आँखों की बारिश से तुम भी कहीं भीगती होगी !
बेहतरीन !

ashish ने कहा…

अरे वाह , मन भीग गया . बढ़िया कविताई का सावन

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर ...