शनिवार, 31 मार्च 2012

...तो आप प्रेम मे है.


जब आपको लगने लगे कि आसमान केवल नीला ही नही बल्कि पीला गुलाबी और नारंगी भी  होता है तो समझ लीजिये कि आपको प्रेम हो गया है. जब आप चम्पा रातरानी रजनी गन्धा और मोगरे की गन्धो से एकाएक सराबोर महसूस करे तो समझिये कि आप प्रेम मे है.जब आप बेलौस रोमानियत के सहारे आसमान को नापने, रेतीले पठारो को पार करने, और समन्दर की गहराईयो मे उतरने चलते है तो आप प्रेम मे है.
जरा सुबह जल्दी उठकर चारदीवारी से बाहर निकलिये सुबह उगते हुये सूरज की लाली माथे पर मलिये, पंछियो की चहचहाट और कलरव को सुनिये,आंखे बन्द किये हुये देखिये . संसार का हर कण आपके प्रेम मे होने की गवाही दे रहा होगा.  चान्दनी रातो की धवल रोशनी मे खुद को ताजमहल मे परिवर्तित हुये देखिये. प्रेम मे होना जिन्दगी का खुशनुमा पल होता है.ऐसे ही पलो की बारिश मे भीगने पर मन झूमता है, गाता है,कवि हो उठता है. संसार की खूबसूरती इन्ही पलो से बनती है.
परवीन शाकिर के अल्फाज़ो मे
"कह रहा है किसी मौसम की कहानी अब तक
जिस्म बरसात मे भीगे हुये जंगल की तरह
तेरी चाहत के भीगे  हुये पलो मे
मेरा तन मोर बनकर नाचता है"

6 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आज 01/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Reena Maurya ने कहा…

जब प्रेम में हो तो सारे मौसम अपनी स्थिति से विपरीत ही लगते है..
सुन्दर प्रेममयी रचना....

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत खूब क्या बात ह, मुबारक हो

Deepak Saini ने कहा…

जब प्यार होता है तो ऐसा ही होता है

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

प्रेम की बहुत ही सुन्दर परिभाषा .......
बहुत खूबसूरत.............

ramji ने कहा…

सब जग हरि आधीन है , हरि प्रेम आधीन

ताहि ते हरी आपु ही याहि बड़प्पन दीन्ह....

हरि जो दुखों को हर ले ,खुशियाँ दुःख को हर लेती हैं , आदर से ही ख़ुशी मिलाती है , आदर की पराकाष्ठा

ही प्रेम है ,,, प्रेम या एक दुसरे का आदर प्राप्त करने के लिए ही संसार में सब काम होते हैं ,

आदर देने से आदर मिलता है , ....प्रेम उभयनिष्ठ होता है , ये पाने वाले को जितनी ख़ुशी देता है , देने वाले को भी उतनी ही ख़ुशी देता है .....