सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

चंदा ने ओढाई प्रीत की चूनर


                                                            












चंदा ने ओढाई प्रीत की चूनर
धरती है लजियात,
मत करो जाने की
तुम बात.
अम्बवा के तले अमराई झरे
महुए की गमक चहु ओर फिरे,
कोयलिया बिलखात
मत करो जाने की
तुम बात.
रस घट फूटा भीगा यौवन
तरुण हो रहे कण  कण,
पुलक उठे है पात
मत करो जाने की
तुम बात.
मुग्ध हुए है हर सिंगार
बन  सेज पिया की,
चंचल नैनो की चितवन
बोलती बात हिया की.
यह मधुमास की रात
मत करो जाने की
तुम बात.

2 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

क्‍या बात है पवन भाई। कविता और चित्र दोनों लाजवाब हैं।

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..की-बोर्ड वाली औरतें।