रविवार, 2 अक्तूबर 2011

मेरी आदिशक्ति से एक प्रार्थना


हर बार नवरात्रो मे मेरी आदिशक्ति से एक प्रार्थना होती है इस बार मैने उस शक्ति के एक स्वरूप  शारदे से अपने मन की बात कही है.















आज सुन मेरी तू पुकार मातु शारदे 
अरज ये कर स्वीकार  मातु शारदे 
जाग जावे  हिंद  के परिंद  अब निंद से
ऐसी एक भर हुंकार मातु शारदे

भारत की कीरती बनी रहे सदा सदा 
आन बान शान पर जान मेरी हो  फिदा
मेरे तन औ वतन की मिट्टी मिले इस तरह 
खाक होने पर भी कभी होवे ना हम जुदा 

सदियो से जमे हुये खून को उबाल दे
नस नस मे वो अंगार भर शारदे 
द्रोहियो के मुंड को जो खंड खंड कर दे 
ऐसी एक प्रचंड तलवार कर शारदे

राम के ही वास्ते जिये मरे हुसैन अली
हिफाजते रहीम चले आवे बजरंग बली
आरती अजान औ रसूल भगवान मे
माँ के जैसा भावमयी प्यार भर शारदे