शनिवार, 10 सितंबर 2011

बरस बीते मौन के



लगभग ३ महीने बाद मुखातिब हुआ हूँ.इस दौरान काफी कुछ सीखने समझाने और अनुभव करने का अवसर प्राप्त हुआ. मैंने साइंस ब्लागर असोसिएशन पर कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी दी है.  विगत तीन महीने मेरे जीवन मे अहम रहे .आप लोगो से आगे मै शेयर करूंगा 
अभी आप मेरी पुरानी कविता का आनंद लीजिये 







झुरमुटों से छन के आयी
किरन आसमान से
बांसुरी बोल पड़ी
स्वागत मेहमान के

गुंजर बिहस उठे
आख़िरी पहर में
महक उठी रातरानी
मुग्ध स्वर बिहान के

पांखुरी चटकने लगी
मेरे उपवन के
अंखुवे निकले फिर
पतझारे बन के

सुधिया मुसकराने लगी
बीत गयी रैन के
डोली धरती और
बरस बीते मौन के