गुरुवार, 2 जून 2011

अपर्णा त्रिपाठी वापस ब्लागजगत में: पलाश के फूल फिर खिलेंगे

आगे बढ़ते बढ़ते अगर सामने बड़ा गड्ढा दिखे तो उसे पार करने के लिए पीछे की तरफ जाना होता है. मगर इसका ये मतलब नही कि आगे जाने का इरादा ही छोड़ दिया. इसका मतलब होता है कि और मजबूती से हम आगे बढ़ने को है. इस दौरान मन में तमाम संशय भ्रम इत्यादि पलते है किन्तु ये सब अपनों के संबल शुभकामनाओं और आशीषों से ख़तम हो जाते है. २३ मार्च को जब अपर्णा ने अपनी लेखनी को अकेडमिक ब्रेक दिया तो कुछ ऐसी ही परिस्थितिया थी. मुझे अपनी बहन पर गर्व है कि वह इन सभी बाधाओं को सफलतापूर्वक पार करते हुए अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया. मुझे यह बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि एम् एन आई टी इलाहाबाद की सत्रीय परीक्षा में अपर्णा को ए ग्रेड मिला.
जब विपरीत परिस्थियों  में सभी फूल मुरझाने को होते है पलाश तभी अपने चटख रंग  बिखेरते हुए खिलता है. जल्द ही यह पलाश ब्लागजगत में अपने रंग बिखेरते आप सबके सामने होगा.