सोमवार, 21 मार्च 2011

तरुनाई का प्यार मुझे फिर याद आया.










अरसे  से गुम   मौसम
 फिर वापस आया
 तरुनाई का प्यार
 मुझे फिर याद आया.

बीते पल के तहखाने में 
रखा हुआ  बक्सा खोला
टूटी पेन सूखे दावात
और  फटा बस्ता खोला


एक मुड़े कागज में
तेरा नाम लिखा पाया

कुछ कटी पंक्तियाँ गानों की
अंतिम पन्ने पर
एक कहानी  झलक रही 
स्याही के धुंधले  धब्बे पर 

सूखे गुलाब की पंखुड़ियों में
तेरा अक्स उभर आया  

आँखों से  तकरार और
फिर एक  कोमल मनुहार 
भोली बातों में खिलता था 
छहों दिनों का प्यार 

 वो दुखदायी रविवार
मुझे फिर याद आया

तरुनाई का प्यार
मुझे फिर याद आया.