सोमवार, 7 मार्च 2011

कुछ बच्चे है इस दुनिया में जो रात में भूखे रोते है















जिनके उपभोगसे होता है
धरती का तापीय परिवर्तन
कभी नहीं जो सो सकते है
बिना किये वातानुकूलन

मोटे गद्दों पर  सोने वालों
क्या कभी जान पाओगे
कुछ लोग भी है इस दुनियामे
जो फुटपाथों पर सोते है

सूखे के इस मौसम में
आँखों का पानी भी सूखा
कुआ ताल नदिया सब  सूखी  
गले के संग ह्रदय भी सूखा

मिनरल वाटर को पीने वालों
क्या कभी जान पाओगे
कुछ लोग भी है इस दुनिया में
दो बूँद को रोज़ तरसते है

नन्ही जर्जर काया जब
रोटी के लिए बिलखती है
उन बच्चों की माताओं की 
सूखी छाती फटती है

भारत निर्माण के निर्माताओं
क्या कभी जान पाओगे
कुछ बच्चे है इस दुनिया में
जो रात में भूखे रोते  है