मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

हंसते हुए जीवन को संवार लिया जाय











हंसते हुए जीवन को संवार लिया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय

उड़ते हुए बादल मस्ती में झूमते है
मस्ती ही जीवन है हमसे ये कहते है
मस्ती में हर घड़ी को गुज़ार लिया जाय

सतरंगे इन्द्र धनुष से कुछ रंग चुराकर
सांझ की धूप को आँगन में बुलाकर
बीते हुए लम्हों को दुलार लिया जाय

निशिगंधा की महक साँसों में भरकर
ओस की बूंदों में तन मन घोलकर
खिली हुयी चाँदनी से प्यार किया जाय

हंसते हुए जीवन को संवार लिया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय