रविवार, 30 जनवरी 2011

प्यार की फ़स्ल उगाये ज़मी रहे दिल शाद मौला


 नए साल पर  मैंने अपने अमन के वास्ते  चन्द गुजारिशे की थी.. यह  गुजारिश मेरे अहले वतन और मिरे प्यारे हमवतनो की खातिर है.    देश में इस समय ज़मीं की नमी ख़तम होने को है तो मुहब्बत की ऐसी बारिश की दुआ मांगी थी  कि सदियों सदियों तक दिलो से गीलापन ख़त्म ना हो. आँखों में पानी बना रहे. 
नफरत और भ्रम ये दो चीजे ऐसी है जिससे देश आज तबाही के मुहाने पर आ गया है मै ईश्वर से आशीवार्द  के रूप में इन चीजो को ख़तम करना मागता हूँ क्युकी इनसान अब अपना ज़मीर बेच कर उपदेश देने लगा है .
मेरे मन की मुराद पूरी कर मौला.

नए साल पर पूरी कर मेरे मन की मुराद मौला
मिरे वतन के सीने पर ना हो कोई फसाद मौला

बच्चों का आँगन ना छूटे, बूढ़े नींद चैन की सोवें
बहने चहके चिडियों सी माओं की गोद आबाद मौला  

रोटी कपडा मकान हर इक  शख्स को हासिल हो
प्यार की फ़स्ल उगाये ज़मी रहे दिल शाद मौला 

अली खेले होली, सिवई खिलाये घनश्याम ईद की
गंगा जमुना का पानी अब और नाहो बरबाद मौला