बुधवार, 12 जनवरी 2011

ऐ खुदा तुझ पे एहसान कर रहा हूँ













तेरी दी हुयी ज़िंदगी   जी रहा हूँ
ऐ खुदा तुझ पे  एहसान कर रहा हूँ

ऊंचे मकान वालो पर इतनी इनायत क्यूँ
मुझ पर तेरी नज़र टिके अरमान कर रहा हूँ

मस्जिद बनेगी तेरी जरा सब्र और कर
माँ की दवाई बंद कर मै दान कर रहा हूँ

 नाराज ना हो खून में डूबा नहीं खंज़र
काफिर औ' मुसलमान में पहचान  कर रहा हूँ

हुक्म की तामील में  इतनी  जल्दी भी क्या है
काजी  के फतवे क़ा  का मै ध्यान कर रहा हूँ
                
ऐ खुदा तुझ पे  एहसान कर रहा हूँ