रविवार, 9 जनवरी 2011

सभी खुरापतिये ब्लागरो से रामबाण निवेदन है कि खुरापात बंद करे. नहीं तो..................

बहुत दिन तक मै चाँद पर रहा धरती पर लौटा तो देखा बस्तिया जल रही थी,(जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी).  मै तो अमन की हालात में गया था. फिर यह बमचक क्यों मचा है. थोड़ी बहुत खोजबीन के बाद पता लगा कि वही पुराने नीरो टाइप के बन्दे है,जिन्हें घरफूंक तमाशा देखने से ज्यादा आनंद और कही नहीं मिलता.
जनाब सनवर कमाल  पानी पी पी के चिल्ला रहे थे कि.... हम नहीं सुधरेगे .... ये गया बमगोला धरम क़ा  अब आग और भभकेगी अरे ये तो बात कम बन रही है ... ये गया दूसरा बमगोला औरतोवाला अब महामजा  आया (वैसे ये लेटेस्ट अजमाया तरीका है). खूब चिल्लपों मची.
मुंडे मुंडे मति  भिन्ना यही भिन्न भिन्न पूरे ब्लॉगजगत  में सुनायी दे रही है. एक बात और १९१६ में जो गलती हुई थी उसे ये लोग बार बार दुहरा रहे है.
ऐसा लग रहा है कि गंगा क़ा पानी अब कचरे की झील से ज्यादा नहीं है. मै तो पहले बी. एन शर्मा से त्रस्त था अब तो लगता है ब्लोगरो में शर्मा जी की आत्मा प्रवेश कर गयी है. एक नया मुहावरा देखने को मिला "मै तुझे खुजाऊ तू मुझे खुजा "  अरे भाई  टिप्पणी   देने के माध्यम से यदि ब्लॉग विजिट हो तो उसमे क्या  बुराई है .
कुल मिला कर लब्बो लुआब यह है कि वंचित महसूस करने वाले लोग (असल में इन्हें चाहिए कुछ और तो ब्लॉग को ही माध्यम  बना रहे है) ब्लॉग जगत को गिद्धों की तरह नोच नोच कर खाए जा रहे है.
एक जगह की रोशनी किसी के घर के जलने से नहीं आ रही है. यह तो अमन क़ा पैगाम है. एक शमशेर  मासूम जी के नाम
"मेरी हिम्मत को सराहो मेंरे हमराह बनो
मैंने एक शमा जलाई है अंधड़ो के खिलाफ"
अब किसी को इस बात से रंज होगा कि ये वो लाइन नहीं है ये है. भईया अपने में मस्त रहो ना कोई जरूरी  है कि मेरे लिए वो बात सही हो जो आपके लिए सही हो. व्यर्थ में विलाप किस हेतु?

निदा फाजली साहब से कुछ सीख लिया जाय

सब की पूजा एक सी, अलग अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी, कोयल गाये गीत

पूजा घर में मूर्ती, मीरा के संग श्याम
जितनी जिसकी चाकरी, उतने उसके दाम

मिट्टी से माटी मिले, खो के सभी निशां
किस में कितना कौन है, कैसे हो पहचान

सभी खुरापतिये ब्लागरो से रामबाण निवेदन है कि  खुरापात बंद करे. नहीं तो..................
भैये....
ब्लॉग जगत की आग हम सब के दिलो से होती हुई घरो तक पहुच जायेगी और सब कुछ स्वाहा हो जायेगा अरे अगर आपको बात करनी है तो.........

कुछ फूलों की बाते हो कुछ प्यार की बाते हो
कुछ तितली की बाते हो कुछ मनुहार की बाते हो


ज्ञान की बाते हो कुछ विज्ञान की बाते हो
हँसी ख़ुशी की बाते हो कुछ मुस्कान की बाते हो


नीले आसमान के नीचे बरगद की शाखों के पीछे
कुछ धूप की बाते हो कुछ छांव की बाते हो


मीठी लोरी को सुनकर माँ के आँचल में छुपकर
सपनो की बाते हो कुछ परियो की बाते हो


कुछ फागुन का रंग चढ़े कुछ सावन की बरसाते हो
कुछ बचपन की बाते हो कुछ यौवन की बाते हो

उम्मीद है कि मुझे फिर धरती रूपी ब्लॉग पर ये फसाद नहीं देखने को मिलेगे
इति सिद्धम