मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

महीना दिसम्बर हुआ










कोहरे का घूंघट ,
हौले से उतार कर ।
चम्पई फूलों से ,
रूप का सिंगार कर ॥

अम्बर ने प्यार से   ,
धरती को जब छुआ ।
बरफीली ठंडक लिये ,
महीना दिसम्बर हुआ ॥

धूप गुनगुनाने लगी ,
शीत मुस्कुराने लगी ।
मौसम की ये खुमारी ,
मन को अकुलाने लगी ॥

आग का मीठापन जब ,
गुड से भीना हुआ ।
बरफीली ठंडक लिये ,
महीना दिसम्बर हुआ ॥

हवायें हुयी संदली ,
चाँद हुआ शबनमी ।
मोरपंख सिमट गये ,
प्रीत हुयी रेशमी ।।

बातों-बातों मे जब ,
दिन कही गुम हुआ ।
बरफीली ठंडक लिये ,
महीना दिसम्बर हुआ ॥

12 टिप्‍पणियां:

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

दिसम्बर में दिसम्बर की
कविता का पढना हुआ
समझा हमने की अब
महीना दिसम्बर हुआ

बहूत खूब कहा मित्र

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत खूब सर!

सादर

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

आज कल महीने के बारे में कहना बड़ा ही मुश्किल है ... रोज ही मौसम बदल जाता है
शादी करनी चाहिए या नहीं?

Pallavi ने कहा…

waah !! kya baat hai ...bahut sundar aur manmohak rachnaa samay mile kabi to zarur aaiyegaa meri post par aapka svagat hai
http://mhare-anubhav.blogspot.com/
http://aapki-pasand.blogspot.com/2011/12/blog-post_07.html

Roshi ने कहा…

सही वक़्त परसुंदर रचना ,मौसम रचना के अनूकुल ही है

Shah Nawaz ने कहा…

अम्बर ने प्यार से ,
धरती को जब छुआ ।
गुलाबी ठंडक लिये ,
महीना दिसम्बर हुआ ॥

वाह! क्या बात है पवन भाई! बेहतरीन!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 12/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति ...

vidya ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर...
मधुर कविता

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

क्या खूब मौसम का हाल लिया है आपने.... बहुत ही खुशनुमा प्रस्तुति बिलकुल दिसंबर के महीने की तरह.

शहर कब्बो रास न आईल

Deepika Munot ने कहा…
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Deepika Munot ने कहा…

आपकी कविता कोई चुरा कर अपने नाम से facebook पर साझा कर रहा है।