रविवार, 2 अक्तूबर 2011

मेरी आदिशक्ति से एक प्रार्थना


हर बार नवरात्रो मे मेरी आदिशक्ति से एक प्रार्थना होती है इस बार मैने उस शक्ति के एक स्वरूप  शारदे से अपने मन की बात कही है.















आज सुन मेरी तू पुकार मातु शारदे 
अरज ये कर स्वीकार  मातु शारदे 
जाग जावे  हिंद  के परिंद  अब निंद से
ऐसी एक भर हुंकार मातु शारदे

भारत की कीरती बनी रहे सदा सदा 
आन बान शान पर जान मेरी हो  फिदा
मेरे तन औ वतन की मिट्टी मिले इस तरह 
खाक होने पर भी कभी होवे ना हम जुदा 

सदियो से जमे हुये खून को उबाल दे
नस नस मे वो अंगार भर शारदे 
द्रोहियो के मुंड को जो खंड खंड कर दे 
ऐसी एक प्रचंड तलवार कर शारदे

राम के ही वास्ते जिये मरे हुसैन अली
हिफाजते रहीम चले आवे बजरंग बली
आरती अजान औ रसूल भगवान मे
माँ के जैसा भावमयी प्यार भर शारदे

10 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति . आभार

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत संदर प्रार्थना, भक्तिपूर्ण रचना आभार ....

Pallavi ने कहा…

उदेश्य युक्त सार्थक सरस्वती वंदना...
समय मिले तो कभी आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/

Kavita Prasad ने कहा…

Apki bhavnao ko Naman!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

बहुत सुन्दर और सामयिक प्रार्थना

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सुन्दर प्रार्थना...
बधाई...

कविता रावत ने कहा…

राम के ही वास्ते जिये मरे हुसैन अली हिफाजते रहीम चले आवे बजरंग बली आरती अजान औ रसूल भगवान मे माँ के जैसा भावमयी प्यार भर शारदे
.....बहुत सुन्दर भक्तिपूर्ण प्रार्थना..

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

bahut hi khoobsoorat prastuti

दीपक कुमार मिश्र ने कहा…

bahut hi khoobsoorat prastuti