सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

दियना करे उजास

















खेतों में बागो में दियना करे उजास,
मीठी सी लौ भर रही चारो ओर मिठास.

दसो दिशाओं में घुली भीनी-भीनी गंध,
कण-कण पुलकित हो उठे लूट रहे आनंद.

नयी फसल लेकर आयी घर में गुड औ धान,
लईया खील बताशों से अभिनंदित मेहमान.

गेरू गोबर माटी से लिपा पुता है गाँव,
घर से भगे दलिद्दर सर पे रखकर पाँव.

झांझ मजीरा ढोलक बाजे झूम रही चौपाल,
नाचे मन हो बावरा देकर ताल पे ताल.

फूटी मन में फुलझड़िया पूरण होगी आस,
परदेसी पिऊ आ गए गोरी  छुए  अकास.

दीवाली ने कर दिया ज्योतिर्मय संसार,
सबके आँगन में खिले सुख समृद्धि अपार.

बुधवार, 5 अक्तूबर 2011

जनप्रतिनिधि को चुनने से पहले विचार करे: प्रश्नावली


१. क्या आप अपने प्रतिनिधि/प्रत्याशी  के शैक्षिक योग्यता के बारे में जानकारी रखते है
                           हां/नहीं
२.क्या आप अपने प्रतिनिधि/प्रत्याशी के पास उपलब्ध परिसम्पत्तियो के बारे में जानकारी रखते है 
                           हां/नही 
यदि हां तो परिसंपत्तियों के स्रोत जहा से उसने धन अर्जन किया है, के बारे में जानकारी रखते है?
                           हां/नही 
३. क्या आपका प्रतिनिधि/प्रत्याशी आपसे सीधा संवाद करता है व सहज रूप से उपलब्ध रहता है?
                           हां/नही
४. क्या आपका प्रतिनिधि/प्रत्याशी आपकी समस्यायों से सरोकर रखता है?
                              सरोकार रखा है/ केवल दिखावा करता है.
५. क्या आप का प्रतिनिधि/प्रत्याशी विकास हेतु मिलने वाली धनराशी का सही सही विवरण  देता  है?
                             हां/नही 
  यदि देता है तो क्या आप यह मानते है कि विवरण  सही है?
                             हां /नही 
६.जन लोकपाल का विरोध करने वाला आपका प्रतिनिधि हो सकता है ?
                             हां /नही 
७. आपके मतानुसार जनप्रतिनिधि/प्रत्याशी कैसा होना चाहिए?
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रविवार, 2 अक्तूबर 2011

मेरी आदिशक्ति से एक प्रार्थना


हर बार नवरात्रो मे मेरी आदिशक्ति से एक प्रार्थना होती है इस बार मैने उस शक्ति के एक स्वरूप  शारदे से अपने मन की बात कही है.















आज सुन मेरी तू पुकार मातु शारदे 
अरज ये कर स्वीकार  मातु शारदे 
जाग जावे  हिंद  के परिंद  अब निंद से
ऐसी एक भर हुंकार मातु शारदे

भारत की कीरती बनी रहे सदा सदा 
आन बान शान पर जान मेरी हो  फिदा
मेरे तन औ वतन की मिट्टी मिले इस तरह 
खाक होने पर भी कभी होवे ना हम जुदा 

सदियो से जमे हुये खून को उबाल दे
नस नस मे वो अंगार भर शारदे 
द्रोहियो के मुंड को जो खंड खंड कर दे 
ऐसी एक प्रचंड तलवार कर शारदे

राम के ही वास्ते जिये मरे हुसैन अली
हिफाजते रहीम चले आवे बजरंग बली
आरती अजान औ रसूल भगवान मे
माँ के जैसा भावमयी प्यार भर शारदे