शनिवार, 10 सितंबर 2011

बरस बीते मौन के



लगभग ३ महीने बाद मुखातिब हुआ हूँ.इस दौरान काफी कुछ सीखने समझाने और अनुभव करने का अवसर प्राप्त हुआ. मैंने साइंस ब्लागर असोसिएशन पर कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी दी है.  विगत तीन महीने मेरे जीवन मे अहम रहे .आप लोगो से आगे मै शेयर करूंगा 
अभी आप मेरी पुरानी कविता का आनंद लीजिये 







झुरमुटों से छन के आयी
किरन आसमान से
बांसुरी बोल पड़ी
स्वागत मेहमान के

गुंजर बिहस उठे
आख़िरी पहर में
महक उठी रातरानी
मुग्ध स्वर बिहान के

पांखुरी चटकने लगी
मेरे उपवन के
अंखुवे निकले फिर
पतझारे बन के

सुधिया मुसकराने लगी
बीत गयी रैन के
डोली धरती और
बरस बीते मौन के

17 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

सुधिया मुसकराने लगी
बीत गयी रैन के
डोली धरती और
बरस बीते मौन के

बहुत बढ़िया लिखा है सर।

सादर

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 12/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

वन्दना ने कहा…

bahut sundar bhavavyakti.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया नवगीत रचा है आपने!

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति| धन्यवाद|

एस.एम.मासूम ने कहा…

स्वागत है आप का. अपने तजुर्बे हमें भी बताएं. वैसे भाई कहां कहां रहे क्या क्या किया. ?

vandana ने कहा…

झुरमुटों से छन के आयी
किरन आसमान से
बांसुरी बोल पड़ी
स्वागत मेहमान के

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

अच्‍छा लगा फिर से यह मुस्‍कराहट देखकर...

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क्‍यों डराती है पुलिस ?
घर जाने को सूर्पनखा जी, माँग रहा हूँ भिक्षा।

Amrita Tanmay ने कहा…

सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है | सुन्दर रचना |

Amrita Tanmay ने कहा…

सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है | सुन्दर रचना |

PRO. PAWAN K MISHRA ने कहा…

मासूम भाई. मेरा दूसरा ब्लाग हरी धरती देखे या साइंस ब्लागर्स असोसिएसन देखे.

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही बढि़या ।

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुधिया मुसकराने लगी
बीत गयी रैन के
डोली धरती और
बरस बीते मौन के....बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति| धन्यवाद|

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बढ़िया गीत...
सादर...

रेखा ने कहा…

खुबसूरत अभिव्यक्ति ...

anita agarwal ने कहा…

सुधिया मुसकराने लगी
बीत गयी रैन के
डोली धरती और
बरस बीते मौन के
wah kitna sunder...apki bhasha mei ek komalta hai madhurya hai...

anita agarwal ने कहा…

kya apko nahi lagta ki apko bhi ere blog par ek nazar drishti dalni chahiye? mei to apki follower ban chuki hoon...kya aap mujhae is kabil samajhte hain?