गुरुवार, 9 जून 2011

प्रिय मित्रों आज से मै ब्लागजगत से अवकाश ले रहा हूँ.

प्रिय मित्रों आज से मै ब्लागजगत से अवकाश ले रहा हूँ. मुझे लगता है कि इस समय देश में जो हालात बन रहे है उस पर आभासी दुनिया में लिखने की बजाय वास्तविक दुनिया में कार्य करूँ तो मेरी प्रवृत्ति के ज्यादा अनुकूल होगा. भाइयो बहनों आज तक मैंने ब्लागिंग को सामाजिक  परिवर्तन, सम्बन्ध  साहित्य साधना, नकारात्मकता का प्रतिरोध और सौहार्द्रता के साधन के रूप में प्रयोग करता रहा. ब्लागिंग के सहारे कानपुर यूनिवर्सिटी में नक़ल और भ्रष्टाचार के खात्मे का जो कार्य किया गया शायद उसकी मिसाल दूसरी मिले.मैंने गंगा पर वर्क किया नतीजा सामने रखा. पर्यावरण के पहलुओं पर बारीक अध्ययन आप लोगो के सामने रखा. विश्वविद्यालयों के करप्शन पर जडमूल चोट की.(अ )धार्मिक खलीफाओं की क्लास ली.साहित्य सर्जना की.कानपुर ब्लागर्स असोसिएसन  की स्थापना में भूमिका निभाई. किन्तु  मुझे लगता है कि ग्राउंड लेवल पर  वर्क करने की और ज्यादा जरूरत है. आज सुबह जाकिर भाई से वार्तालाप के पश्चात मैंने गहन चिंतन किया और पाया कि यह सही वक्त है जब मुझे जमीनी स्तर पर  उतर कर और ज्यादा अनुभव बटोरने चाहिए.
इसके लिए मै   भारत भ्रमण, शोध अध्ययन, लोगो से मुलाकात साक्षात्कार,  सामाजिक परिवर्तन हेतु आंदोलनों का हिस्सा बनूगा. इस दौरान मै विभिन्न पुस्तकों  के अध्ययन व पुस्तक लेखन का कार्य करूंगा. एक बात मै स्पष्ट कर दू कि मै एक ब्रेक  ले रहा  हूँ जिसका मकसद साधना द्वारा  स्वयं का विश्लेषण करना और ऊपर उल्लेखित कार्यों को करना है.

 भविष्य में ब्लागजगत में फिर से आप लोगों से मुलाक़ात होगी इसी कामना के साथ अनुमति ले रहा हूँ.

आपके प्यार के लिए आभार 
आपका 
...पवन 

25 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

शुभकामनाएँ!!!

Udan Tashtari ने कहा…

आप अपने मकसद में सफल हों, अनेक शुभकामनाएँ. इन्तजार रहेगा वापसी का.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

प्रोफ़ेसर पी. के. मिश्रा साहब ! हमारी शुभकामनाएं भी आपके साथ हैं। मुमकिन हुआ तो आपको कुछ किताबें भिजवाने की कोशिश करूंगा।
आपकी याद बनी रहेगी।
आज भी आपकी रचना ‘चांद जागता रहा, रात हुई माधुरी‘ पढ़ रहा था। आपकी यह रचना अद्वितीय है। हिंदी ब्लॉग जगत को आपने यह बेशबहा रचना इनायत की, इसके लिए हम आपके शुक्रगुज़ार हैं। जो कुछ कहा सुना हो, उसे माफ़ करते जाइयेगा।
आशा है बेहतर हालात में आपकी और बेहतर रचनाएं पढ़ने को मिलेंगी।
धन्यवाद !
चाँद जागता रहा, रात हुई माधुरी Moon on the bed

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

अरे।

वैसे अपनी जगह पर आपका सोचना सही है। लेकिन इतना ध्‍यान रखिए काम करने के लिए कोई भी क्षेत्र न तो छोटा होता है और न ही बडा।
मेरा अपना मानना है कि इस निर्णय के पीछे आपका विचलन साफ दिख रहा है। यह अच्‍छा संकेत नहीं है। क्‍योंकि अगर यही विचलन भीतर जमा रहा, तो एक दिन यह तब फिर अपना सर उठा सकता है, जब आप इस नये क्षेत्र में काम कर रहे हों। क्‍योंकि आलोचनाओं का सामना तो आपको वहां भी करना ही होगा।
इसलिए सतर्क रहें और अपने आपको टटालें भी कि अपना फैसला बदलने के पीछे दूसरों का व्‍यवहार जिम्‍मेदार तो नहीं।
मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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बाबूजी, न लो इतने मज़े...
चलते-चलते बात कहे वह खरी-खरी।

Shah Nawaz ने कहा…

आपके द्वारा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन हेतु चिंतन-मनन तथा ग्राउंड लेवल पर काम करने के फैसले

Shah Nawaz ने कहा…

आपके द्वारा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन हेतु चिंतन-मनन तथा ग्राउंड लेवल पर काम करने के फैसले पर बहुत खुशी हुई... बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

किलर झपाटा ने कहा…

चलिये कोई बात नहीं।

ZEAL ने कहा…

.

Dear Dr.Mishra,

My best wishes are with you . May you succeed in all your endeavors.

.

PRO. PAWAN K MISHRA ने कहा…

जाकिर भाई....
मैंने खूब सोच विचार के बाद ये कदम उठाया है.रही बात दूसरो से विचलित होने का तो मानव होने के कारण विचलन स्वाभाविक है. इस दुनिया में प्रयेक व्यक्ति विचलित होता है. लेकिन मेरा विचलन दूसरों के चलन से सम्बंधित नही बल्कि खुद के अन्दर पाए जाने वाले अंतर्विरोधों से है. अगर सामने गड्ढा हो तो पीछे लौटकर आना ही पड़ता है ताकि गड्ढे को पार करने योग्य दौड़ लगाई जा सके.

Akshita (Pakhi) ने कहा…

All the Best !!

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत बहुत शुभकामनाएँ

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बहुत शुभकामनाएँ !!

Rahul Singh ने कहा…

चलिए, फिर मिलेंगे, नई ताजगी, नई उर्जा के साथ.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आप अपने उद्देश्य में सफल हों!

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

हार्दिक शुभकामनाएँ...

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

All the Best !!

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

All the Best !!

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

शुभकामनाएं,
अपने महती उद्देश्य में सफ़ल हो।
फ़िर मिलेगें उसी ठिकाने पर :)

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

व्यस्त दिनचर्या से दूर हो आज महीनों बाद ब्लॉग जगत में उपस्थित हुआ, सुखद भारत यात्रा के लिए मंगल कामनाएँ. उम्मीद करता हूँ कि ये भारत यात्रा ब्लोगरी में एक नया मुकाम हासिल करने में सहायक होगी............

surendrshuklabhramar5 ने कहा…

पवन मिश्र जी पहले तो आप के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रभु से प्रार्थना है -
फिर बहुत बहुत बधाई आल इण्डिया अचीवर्स फौन्डेशन ने शिक्षा के क्षेत्र में आउट स्टैंडिंग परफार्मेंस के लिए आप को पुरस्कार दिया -यह आपकी कड़ी मेहनत और सुन्दर चरित्र का द्योतक है - सुजानगंज से हमारा भी पुराना रिश्ता रहा जिससे आप के कारण वहां की याद आ जाती है -ढेर सारी शुभ कामनाएं आप प्रगति के सोपान पर यों ही चढ़ते चलें -
शुक्ल भ्रमर ५

June 25, 2011 11:04 AM

amrendra "amar" ने कहा…

प्रोफ़ेसर मिश्रा साहब, हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 19/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

अच्‍छा लगा रेडियो तेहरान में सुनना।

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बेहतर लेखन की ‘अनवरत’ प्रस्‍तुति।
अब आप अल्‍पना वर्मा से विज्ञान समाचार सुनिए..

Arvind Mishra ने कहा…

यह तो होना ही था -सलाहकार खैर करें !

बेनामी ने कहा…

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