गुरुवार, 17 मार्च 2011

फागुन में धरती झूम रही है एक उदास शाम के जैसी








       


              1.
फागुन में धरती झूम रही है
मस्त नशे में घूम रही है
जग से छुपकर क्षितिज पार
नभ  के अधरों को चूम रही है.


टेसू ने ओढ़ाई  लाल चुन्दरिया
हल्दी रोली   से सजी गुजरिया  
अंग अंग हो गया बसन्ती
वैजन्ती मन में फूल रही है


हुलसित   मन तन  रंग रंगा
चंग ढोल संग बजा मंजीरा
चौताल  मचाया   हुरियारों ने   
दसों दिशा में   गूँज   रही  है.


              2.
इन  रंगों की बारिश लेकिन  
मुझ को  नही भिगो पाती  है
हर बार के जैसे ये होली
मुझे   बेरंगा करके जाती है

एक  उदास शाम के  जैसा  
जीवन  ढलता जाता  है
मै अब भी खोजता वह रस्ता  
जो मेरे गाँव को जाता है















21 टिप्‍पणियां:

suryabhan ने कहा…

ये कौन सा तरीका है भाई
अंतिम दो पद पढने के बाद तो सारा नशा हिरन हो गया
गाँव जाने से कौन रोकता है
वैसे शुरुआत की पंक्तयां तो वाकई रसभरी थी
धरती नशे में घूम रही है
तभी जापान में भूकंप आया क्या
बधाई स्वीकारे

एस.एम.मासूम ने कहा…

होली मुबारक

Voice of youths ने कहा…

सबसे पहले तो होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ देना चाहूँगा| रंगों के इस त्यौहार में आपसी भेदभाव को भुलाकर एक रंग में रंग जाना ही इसकी महत्ता है|
होली पर एक अच्छी कविता के लिए बधाई|

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सही कहा है...अगर होली का रंग और अपना गांव मिल जायें तो होली का मज़ा अलग ही होगा..होली की हार्दिक शुभकामनायें!

ashish ने कहा…

अपने गांव जाने का मन तो मेरा भी हो रहा है . नोस्टालजिक हो रहे है .

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Wah Maja aa gaya , Bas afsosh ki Jat bhai logo le chakkar main gaonv nahi jaa paya.

योगेन्द्र पाल ने कहा…

सूर्यभान जी से सहमत >:\

पाठकों पर अत्याचार ना करें ब्लोगर

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

पवन जी,
सुन्दर शब्दशिल्प ने फागुनई बयार का मजा दूना कर दिया, एक अच्छी रचना के लिये बधाईयाँ।
होली की आप सभी को रंगारंग मुबारकबाद........
सादर,
मुकेश कुमार तिवारी

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

फागुन में धरती झूम रही है
मस्त नशे में घूम रही है
जग से छुपकर क्षितिज पार
नभ के अधरों को चूम रही है.


टेसू ने ओढ़ाई लाल चुन्दरिया
हल्दी रोली से सजी गुजरिया
अंग अंग हो गया बसन्ती
वैजन्ती मन में फूल रही है

----------------HAPPY HOLI

BAHUT SUNDAR RACHANA

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

एक उदास शाम के जैसा
जीवन ढलता जाता है
मै अब भी खोजता वह रस्ता
जो मेरे गाँव को जाता है
आज बहुत दिन बाद ब्लॉग जगत में पहुँचा तो कुछ अच्छा पढ़ने को मिला.पंक्तियाँ दिल को छू गई.

Deepak Saini ने कहा…

अच्छी रचना
!! होली की शुभकामनाये!!

Dr Kiran ने कहा…

अरे इतना परेशान ना हो एक्साम निपटा कर गाँव चलते है

अमित शर्मा ने कहा…

आप को होली की हार्दिक शुभकामनाएं । ठाकुरजी श्रीराधामुकुंदबिहारी आप के जीवन में अपनी कृपा का रंग हमेशा बरसाते रहें।

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

सत्य ही फागुन के मौसम मे धरा की अनुपम छटा देखते ही बनती है। यह ठीक उसी प्रकार की अनुभूति देती है जैसे कोइ गोरी रंग-बिरंगी चुनरी ओढ कर खडी हो।


परन्तु दुर्भाग्य से आज के युग का मानव इस प्राकृतिक सौन्दर्य को समझने मे असमर्थ है उसे सिर्फ कत्रिम सुन्दरता ही पसंद आती है जिसकी हर विमा को वह अपने अनुसार ढाल सके, पर ऐसे मे वो वास्तविक सौन्दर्य को जानना तो दूर उसका शतांश भी नही पा पाता। आप जैसे लोग जिन्होने वास्तविक सौन्दर्य देखा है वो उसको ढ़ूढ़ते हैं, नई पीढ़ी तो जानती तक नही - खोजेगी क्या?

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं। ईश्वर से यही कामना है कि यह पर्व आपके मन के अवगुणों को जला कर भस्म कर जाए और आपके जीवन में खुशियों के रंग बिखराए।
आइए इस शुभ अवसर पर वृक्षों को असामयिक मौत से बचाएं तथा अनजाने में होने वाले पाप से लोगों को अवगत कराएं।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर रचनाएँ ...

होली की शुभकामनायें

वन्दना ने कहा…

सुन्दर रचना…………आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

अजय कुमार ने कहा…

मनभावन होली गीत

सुरक्षित , शांतिपूर्ण और प्यार तथा उमंग में डूबी हुई होली की सतरंगी शुभकामनायें ।

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर होली प्रस्तुति
आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएं

Manpreet Kaur ने कहा…

बहुत ही अच्छा पोस्ट है आपका हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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