गुरुवार, 3 मार्च 2011

देवी माँ और एक मालिनी का संवाद

पूर्वी भारत खासतौर से अवधी क्षेत्रो में दैवीय शक्ति से आम जनता का सीधा सहज  संपर्क  है इसे लोकगीतों के माध्यम से देखा जा सकता है. यहाँ ऊँच नीच छूट अछूत का कोई भेदभाव नहीं दीखता आइए एक पचरा गीत के माध्यम से मै आपको उस संवाद से रू ब रू कराता हूँ जो एक मालिनी और देवी माँ के बीच में होता है बस शर्त एक है कि आप उसी जनमानस के भाव से समझेगे जिस भाव में यह संवाद हुआ है
एक नीम की डाली पर देवीजी ने झूला डाला है और झूल रही है उन्हें प्यास लगती है वर्णन देखे
निमिया की डरिया मईया नावली झुलानवा
हो कि झूलई लागी ना
ओही झुरमुर बयरिया  कि मईया  झूलई लागी ना
झूलत झूलत मईया होई गयी पियासी
हो कि हेरई लागी न ओही
मालिनी के घरवा हो की हेरई लागी न
भीतर  बाटू कि  बहरे मालिनिया  हो की बुंद एक ना
हमका जल अन्चवाऊ मालिनी बूंद एक न

मालिनी क्या जवाब दे रही है

कईसे कि जल अन्चवाई मोरी जननी हो की गोदिया हमरे ना
बाटे बालक नदान्वा   हो की गोदिया हमरे ना

देवीजी की उत्तर देखे

बालक लेटावो मालिनी सोने के खाटोलवा हो की बूंद एक ना
हमका जल अन्चवाऊ मालिनी बूंद एक ना

मालिनी क्या करती है

बालक लेटाई मालिनी पाटे के खाटोलवा हो की दाहिने हाथे ना
लई के सोने के घडिलवा हो लइके रेशमे की डोरिया हो मालिनी बाए हाथे न
मालिनी कहती है
बुन एक पनिया पियाऊ  मोरी जननी हो कि भरी मुख ना
देऊ तू असिसवा हो माई भरी मुख ना

देवी जी का आशीर्वाद देखिये (हालाँकि इस आशर्वाद को लेकर तथाकथित नारीवादियो की तलवारे देवीजी पर खीच सकती है )

जुग जुग जियाई मालिनी गोदी के ललनवा हो कि
जुग जुग बढ़ाई ना तोहरे मांगे के सेंदुरवा
हो मालिनी जुग जुग बाढ़े ना



16 टिप्‍पणियां:

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Ganov ki yad dila di aapne

ashish ने कहा…

सही है सुबह सुबह देवी माँ और मालिन का वार्तालाप अच्छा लगा .

एस.एम.मासूम ने कहा…

यहाँ मेरे कहने जैसा तो कुछ है नहीं , हाँ अपने धर्म के प्रति श्रधा देख के ख़ुशी हुई

suryabhan ने कहा…

ई पचरा त हमका बड़ा नीक लागेला
जय हो माई की

suryabhan ने कहा…

ई पचरा त हमका बड़ा नीक लागेला
जय हो माई की

"पलाश" ने कहा…

भक्ति का एक नया रूप देखने को मिला ।
मासूम साहब आप ऐसा क्यो कह रहे है । भक्ति की एक ही भाषा होती है , और वो होती है सच्चाई ।

Sunil Kumar ने कहा…

प्रेम की भाषा में प्यारी रचना नारी से आप भी डरते है एक आम आदमी ...

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

अति सुन्दर। ऐसे सुन्दर रचनाएं हमारे समाज का प्राण तत्व हुआ करती थीं, हमे अपने समाज को समझने मे अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियां इनके माध्यम से मिलती थी। दुर्भाग्य कहें या समय की मार अब इस प्रकार के लोक गीतों को छोड कर अश्लील गीत हमारे ग्राम्य समाज को अपने आगोश मे ले रहा है।

निर्मला कपिला ने कहा…

सुन्दर रचना। मालिन कभी हमारे जीवन का अभिन्न अंग हुया करती थी कितने विवाह के गीतों मे उसका उल्लेख मिलता है। मगर आज का बाजारवाद उसे भी लील गया। सुन्दर रचना के लिये बधाई।

Dr Kiran ने कहा…

sundar rachna purani yadon ki shrovat hui

Dr Kiran ने कहा…

ganov ki yad nahi dilaya jana ka man hone laga

Dr Kiran ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
यस चंचल ने कहा…

bahut khoobsurat.
pdh karke bahut achchha lga

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जय हो माई की ... अच्छा लोकगीत है ...

ramji ने कहा…

भारत की अंतरात्मा ही देवी हैं

देवी सबकी हैं यही दरसाया गया है

बहुत अच्छा ,,,,,

ram ने कहा…

""JAI MATA JI""
YE PAWAN BELA PAR "JAWAN HMNI KE MAI JI KE NAVRATRA KE NAM SE JANL JALA OHME E AAP KE PRASTUT KVITA PAD KE MAN PRASHAN HO GIL BA"

""JAI MATA DI""