शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

जरा कुछ देर ठहरो तुम अभी तो बात बाकी है


















जरा कुछ देर ठहरो तुम अभी तो बात बाकी है,
सितारे और टूटेंगे अभी तो रात बाकी है .

तुम्हारे एक इशारे पर सुना शोले दहकते है,
मगर देखो की आँखों में अभी बरसात बाकी है.

जमाने भर में चर्चा है की तुम व्यापार करते हो,
मेरे हाथो में अब भी प्यार की सौगात बाकी है.

खुदगर्जी की मूरत हो मझे मालूम है लेकिन,
तुम्हारे वास्ते मेरे अभी जज्बात बाकी है.

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,
मुकद्दर कह रहा है कि  अभी कुछ साथ बाकी है.

28 टिप्‍पणियां:

वन्दना ने कहा…

अहसासों से भरपूर एक बेहतरीन गज़ल के लिये बधाई स्वीकारें।

एस.एम.मासूम ने कहा…

खुदगर्जी की मूरत हो मझे मालूम है लेकिन,
तुम्हारे वास्ते मेरे अभी जज्बात बाकी है.
.
वाह एक अलग सा अंदाज़ है

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

Tariq: "Well written and full of emotional waves.Commendable .
i am proud of you ".

Saiyad Tariq is Excise duty oficer and my dearest friend

Aditya Tripathi ने कहा…

बहुत अच्छी कविता लिखी है ........... कुछ कोशिश हमारी तरफ से!

भले नाविक नहीं हो मानते तुम आज से खुद को
स्वयं तुझको भी तो नईया, लगाना पार बाकी है

उतारे थे जो सीने में ये खंजर लाख बस तुमने
उन्ही खंजर से होना बस तेरा तकरार बाकी है!!

आलोकिता ने कहा…

Bahut hi achi rachna sir

ashish ने कहा…

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,
मुकद्दर कह रहा है कि अभी कुछ साथ बाकी है

भाव प्रधान नज़्म . दिल को छूती हुई . मुक़द्दस मुकद्दर की तरफ इशारा . इत्ता बहुत है जीने के लिए .

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (28-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह! मंच लूट लेने वाली गज़ल।
मझे-मुझे।

Manish ने कहा…

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,
मुकद्दर कह रहा है कि अभी कुछ साथ बाकी है.................

Sunil Kumar ने कहा…

खुबसूरत अहसास को खुबसूरत अल्फ़ाज देना तारीफ़ के क़ाबिल है |शुभकामनायें .

Deepak Saini ने कहा…

बढिया गजल,
शुभकामनाये

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Bahut khub

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,
मुकद्दर कह रहा है कि अभी कुछ साथ बाकी है

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,
मुकद्दर कह रहा है कि अभी कुछ साथ बाकी है....

एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई।

suryabhan ने कहा…

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,
मुकद्दर कह रहा है कि अभी कुछ साथ बाकी है
ये तो कुमार विश्वास से बीस है पवन भाई
अगर आप मंच से सुनाने लगे तो विस्श्वास की छुट्टी हो जायेगी

"पलाश" ने कहा…

सच कहा
कई बार हम जिनसे नही मिलना चाहते वक्त न्हे हमारे समने ले ही आता है
और कई बार हम जिनसे मिलना चहते है , वक्त हमे उनसे दूर कर देता है
अभी क्या क्या खेल खेलेगा वक्त हमारे दिल से
थोडा तो सीख आये है , बहुत सीखना है बाकी

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

अहसासों से भरपूर एक बेहतरीन गज़ल ,शुभकामनायें
http://shiva12877.blogspot.com

Patali-The-Village ने कहा…

एक अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई।

Kailash C Sharma ने कहा…

ख़ूबसूरत अहसासों से परिपूर्ण सुन्दर गज़ल..

Dr Varsha Singh ने कहा…

चर्चा मंच पर आपके ब्लॉग का लिंक मिला . अच्छा लगा.....

तुम्हारे एक इशारे पर सुना शोले दहकते है,
मगर देखो की आँखों में अभी बरसात बाकी है.

बहुत अच्छी ग़ज़ल है।

Abhinav Chaurey ने कहा…

वाह मंच के लिए एकदम उपुक्त रचना। अपनी प्रस्तुति के वीडियो भी अपलोड करें ताकि हम आपकी आवाज मे आपकी रचना का लुत्फ उठा सकें। सस्वर श्रवण का आनंद ही कुछ और है।

Dr Kiran ने कहा…

जरा कुछ देर ठहरो तुम अभी तो बात बाकी है,
सितारे और टूटेंगे अभी तो रात बाकी है
ye sitare kaha toot rahe hai

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

सभी पाठको को हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ
"सोह्बते पीरा यारो फैज़ से खाली नही
जो देखते हो तीर ये जोर है कमान का"

Riteshhhh... Blogs... ने कहा…

waah bahut hi badhiya dil gad gad ho gaya..

Ravindra Nath ने कहा…

प्रेम मे समर्पण का सुन्दर उदाहरण "खुदगर्जी की मूरत हो मझे मालूम है लेकिन, तुम्हारे वास्ते मेरे अभी जज्बात बाकी है."

Ravindra Nath ने कहा…

प्रेम मे समर्पण का सुन्दर उदाहरण "खुदगर्जी की मूरत हो मझे मालूम है लेकिन, तुम्हारे वास्ते मेरे अभी जज्बात बाकी है."

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

@ खुदगर्जी की मूरत हो मझे मालूम है लेकिन,
तुम्हारे वास्ते मेरे अभी जज्बात बाकी है.
--- वचन-विधान पर गौर कीजियेगा ज़रा ..
भाव अच्छे हैं .. सुन्दर!

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

खुदगर्जी की मूरत हो मझे मालूम है लेकिन,
तुम्हारे वास्ते मेरे अभी जज्बात बाकी है.

बना लो दूरिया कितनी हमारे दरमियानो में,

मुकद्दर कह रहा है कि अभी कुछ साथ बाकी है.

bahut sundar rachna.........

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…
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