बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

इक बार कहो ना मीत मेरे














इक बात चाहता हूँ सुनना
तुम जब जब बाते करती हो
इक बार कहो ना मीत मेरे
तुम मुझसे मुहब्बत करती हो


इस दिल को कैसे समझाऊ
लोगो को क्या मै बतलाऊ
है पूछ रहा ये जग सारा
कि तुम मेरी क्या लगती हो


इक नए विश्व कि रचना कर दू
और अंतहीन आकाश बना दूं
इक बार कांपते होठों से
तुम  कह दो मेरी धरती हो

बात जबां की दिल कहता है
मौन की भाषा को गुनता है
चाँद बता जाता है  तुम
सदियोंसे मुझ पर मरती हो


इक बार कहो ना मीत मेरे
तुम मुझसे मुहब्बत करती हो

24 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

इक नए विश्व कि रचना कर दू
और अंतहीन आकाश बना दूं
इक बार कांपते होठों से
त्तुम कह दो मेरी धरती हो

वाह इन पंक्तियों में बसी आत्मा ने भाव विभोर कर दिया . ऐसे लिखते रहोगे तो एकदिन वो जरुर स्वीकार कर लेंगी , शुभकामनाये .

Tarkeshwar Giri ने कहा…

बात जबां की दिल कहता है
मौन की भाषा को गुनता है
चाँद बता जाता है तुम
सदियोंसे मुझ पर मरती हो

Kamal Hi Kar diya apne to.........

Abhinav Chaurey ने कहा…

क्या बात है! बेहद मधुर तुकांत एवं गेय कविता है। सरल शब्दों मे गूढ अर्थ हैं। सरल शब्दों मे लिखा काव्य सामान्य लोगों को पसंद आता है।

अमित शर्मा ने कहा…

@ चाँद बता जाता है तुम
सदियोंसे मुझ पर मरती हो


चाहे लाख गवाही दे दे कायनात का ज़र्रा ज़र्रा, पर जब तलक महबूब अपने श्रीमुख से यह ना कहे तो बेकरार जिया को करार किस प्रकार आये !!!

आपकी रचनाएं बस अलग ही स्वप्निल दुनिया में पहुंचा देतीं है, जहाँ अपने साथी के साथ किल्लोल करता विचरता हूँ .

आनंद आ गया !

Shah Nawaz ने कहा…

खूबसूरत रचना है.... बेहतरीन!!!

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (24-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Sunil Kumar ने कहा…

बात जबां की दिल कहता है
मौन की भाषा को गुनता है
चाँद बता जाता है तुम
सदियोंसे मुझ पर मरती हो
प्रश्न के उत्तर का इंतजार, बहुत ही खुबसूरत अहसास, शुभकामनाये.

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत अहसास, शुभकामनाये|

आलोकिता ने कहा…

kamaal ki rachna hai sir

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत ही सुन्दर अहसास..बहुत भावमयी रचना..

ehsas ने कहा…

अगर पढ़ने से बेहतर इसे गुनगुनाया जाए तो और भी असरदार लगता है। कृप्या कोशिश कर के देखें।

एस.एम.मासूम ने कहा…

इक नए विश्व कि रचना कर दू
और अंतहीन आकाश बना दूं
इक बार कांपते होठों से
तुम कह दो मेरी धरती हो
.
बहुत खूब.पसंद आई यह कविता

Dr Kiran ने कहा…

हर बार कहा न मीत मेरे
मै तुमसे मुहब्बत करती हूँ
मुझे जग से क्या लेना देना
मै सिर्फ तुम्ही पर मरती हूँ

Deepak Saini ने कहा…

sundar bahut sundar

Deepak Saini ने कहा…

sundar bahut sundar

suryabhan ने कहा…

reading this beautiful poem i remind Robert Browning "The Last Ride Together"as Dramatic monologue.

रजनीश तिवारी ने कहा…

दिल की बात है आपकी इस भावभीनी कविता में ...चाँद बता जाता है तुम
सदियोंसे मुझ पर मरती हो ... बहुत सुंदर !

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

आप सभी पाठको को साधुवाद
बड़े भाई आशीष जी आपकी बाते मेरे लिए आशीष ही है
गिरी भाई कमल तो आपका है
भाई अभिनव जी आप जैसे विशुद्ध पाठको का प्यार मिलता रहे
शाहनवाज़ भाई, मासूम भाई मुहब्बत बनी रहे
वंदना जी मेरा सौभाग्य है कि आपका स्नेह हमें बराबर मिलता रहता है.
अमित भाई ये आपका प्यार है
सुनील भाई कैलाश जी दीपक जी आलोकिता आप सब का शुक्रिया
पाताली गाव वाले भाई, सूर्यभान जी(राबर्ट ब्राउनिंग तक अभी नही पहुचा हूँ ) आप सब का शुक्रिया
एहसास जी गुनगुनाने क प्रयास करूगा
रजनीश भाई आपका स्वागत है
और किरण तुम्हारे लिए की कहू
दो पंक्तिया सुनो
"नज़र नीची लबों में हो दबी जो मुसकुराहट तो
उसी मासूमियत पे रहनुमाई झूम जाती है,
ग़ज़ल से जब तुम्हारे प्यार की खुशबू छलकती है
कसम अल्लाह की सारी खुदाई झूम जाती है."

Ravindra Nath ने कहा…

पवन जी - पुनःश्च एक सुन्दर प्रस्तुति आपके द्वारा। श्रंगार रस की धारा बिना अश्लीलता के का ऐसा अनुपम उदाहरण आज के समय मे बहुत ही दुर्लभ हो गया है। आप की इस रचना से दिल आनण्दित हुआ।

Deepak Saini ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता ...वाह

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

प्रेम में सराबोर रचना बड़ी लुभावनी है

सञ्जय झा ने कहा…

jeh:nasiv ..... aise bhavon par koun
na nisar ho jaye......

sadar

"पलाश" ने कहा…

कितनी सादगी से आपने मन की बात को व्यक्त किया है |
और प्रकृति का सानिध्य तो उसे और खूबसूरती दे रहा है

सागर ने कहा…

kya baat hai dada..!!